आस्था की अनूठी मिसाल, 19 बेटियों की टोली के साथ देवघर पैदल निकले गोड्डा के संजीव
भागलपुर, 23 अगस्त (हि.स.)।
सावन के पावन महीने में सुल्तानगंज से देवघर के बीच शिव भक्तों का उत्साह सातवें आसमान पर है। चारों ओर गूंजते 'बम-बम भोले' और 'बोल बम' के जयकारों के बीच भागलपुर और सुल्तानगंज के रास्ते रोजाना लाखों कांवरिया बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पण करने देवघर पहुंच रहे हैं।
इसी शिवमय माहौल के बीच झारखंड के गोड्डा निवासी संजीव कुमार ने आस्था, समर्पण और महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी अनूठी मिसाल पेश की है, जो इन दिनों पूरे कांवरिया पथ पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। गोड्डा के रहने वाले संजीव कुमार पिछले 40 साल से लगातार सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का जल भरकर बाबा बैद्यनाथ के दरबार की कठिन पैदल यात्रा कर रहे हैं।
बाबा के प्रति अगाध श्रद्धा रखने वाले संजीव के लिए इस बार की यात्रा बेहद अनूठी और ऐतिहासिक है। इस बार वे अकेले नहीं, बल्कि अपने परिवार की 19 बेटियों के साथ पैदल देवघर जा रहे हैं। बेटियों की यह खास टोली कांवरिया पथ पर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। इस टोली की खास बात यह है कि इसमें शामिल कई बेटियां कोई नई नहीं हैं, बल्कि वे पिछले एक दशक से लगातार इस कठिन पैदल यात्रा का हिस्सा बन रही हैं।
सावन की इस तपती धूप, बारिश और उबड़-खाबड़ रास्तों के बीच बेटियों का यह उत्साह, अटूट विश्वास और अनुशासन हर शिव भक्त का मन मोह रहा है। यह अनूठी यात्रा समाज में महिला सशक्तिकरण और अपनी परंपराओं के प्रति निष्ठा का एक बेहतरीन संदेश दे रही है।
इस प्रेरणादायक यात्रा के उद्देश्य के बारे में बात करते हुए संजीव कुमार बताते हैं, मेरी इस यात्रा का मुख्य मकसद नई पीढ़ी को गहरी आस्था के साथ-साथ हमारी समृद्ध सनातन संस्कृति से जोड़ना है। जब हमारी बेटियां इस तरह के कठिन संस्कारों और परंपराओं का हिस्सा बनेंगी, तभी हमारी संस्कृति आगे भी जीवित और मजबूत रहेगी। संजीव कुमार और इन 19 बेटियों की यह कांवर यात्रा आज के दौर में न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि पारिवारिक एकजुटता और समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनकर उभरी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

