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किसानों के विरोध के बावजूद 9 करोड़ का मुआवजा भुगतान

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किसानों के विरोध के बावजूद 9 करोड़ का मुआवजा भुगतान


नवादा, 25 अक्टूबर (हि.स.)। गंगाजल आपूर्ति योजना फेज-2, पार्ट-1 के तहत मधुबन जलाशय निर्माण परियोजना से प्रभावित जमीन मालिकों को मुआवजा देने की प्रक्रिया जारी है। जिला भू-अर्जन कार्यालय अनुसार अधिग्रहित भूमि के एवज में अब तक करीब नौ करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके अलावा 324 भूखंडों से जुड़े रैयतों को फसल क्षति और अन्य मदों में कुल 72 लाख 52 हजार 491 रुपये दिए गए हैं। प्रशासन ने बाकी रैयतों से जरूरी दस्तावेज जमा कर मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने की अपील की है।

जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के अनुसार, मधुबन जलाशय परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई भूमि अर्जन, पुनर्वासन और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के तहत की गयी है। अधिनियम की धारा 40 में दिए गए आपातकालीन प्रावधान के तहत 17 अप्रैल 2025 को अधिसूचना जारी की गयी थी. इसके बाद 28 जुलाई 2025 को अधिघोषणा प्रकाशित की गयी।

इस प्रक्रिया में सामाजिक प्रभाव आकलन से छूट दी गयी है. प्रशासन का कहना है कि मुआवजे की राशि न्यूनतम मूल्य पंजी के लगभग साढ़े पांच गुना तक निर्धारित की गयी है। परियोजना के लिए दोनों संबंधित मौजों की अधिग्रहित भूमि सरकार में निहित हो चुकी है. वहीं, जलाशय का निर्माण कार्य भी जारी है। बोरिंग और अन्य परिसंपत्तियों का भी मुआवजा परियोजना से प्रभावित रैयतों को केवल फसल क्षति का ही मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। पात्रता और लागू नियमों के अनुसार अधिग्रहित भूमि, बोरिंग, अन्य परिसंपत्तियों और संरचनाओं के लिए भी मुआवजे का प्रावधान है।

जिन रैयतों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए द्वितीय नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने संबंधित जमीन मालिकों से भूमि स्वामित्व प्रमाण-पत्र (एलपीसी) समेत सभी जरूरी दस्तावेज भू-अर्जन कार्यालय में जमा करने को कहा है, ताकि भुगतान में देरी नहीं हो।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजय कुमार सुमन