स्वर्णप्राशन बच्चों के लिए प्राचीन आयुर्वेदिक संस्कार है:अमरेश कुमार
भागलपुर, 15 जुलाई (हि.स.)। सैनिक स्कूल गणपत राय सलारपुरिया सरस्वती विद्या मंदिर के प्राथमिक खंड पूरनमल सावित्री देवी बाजोरिया सरस्वती शिशु मंदिर नरगाकोठी चंपानगर भागलपुर में बुधवार को स्वर्णप्राशन संस्कार प्रारंभ किया गया।
कार्यक्रम का प्रारंभ विद्यालय की अभिभाविका स्नेहा राज, नीलम कुमारी, पिंकी कुमारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस मौके को विद्यालय के प्रधानाचार्य अमरेश कुमार ने कहा कि स्वर्णप्राशन बच्चों के लिए प्राचीन आयुर्वेदिक संस्कार है जिसमें स्वर्ण भस्म, घी, शहद एवं अनेक प्रकार के जड़ी बूटियां का मिश्रण है। यह दवाई 12 साल तक के बच्चों को हर महीने पुष्य नक्षत्र की तिथि को पिलाई जाती है। इस दवाई से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, मानसिक और शारीरिक विकास, बुद्धि, एकाग्रता, स्मरण शक्ति, पाचन शक्ति को बढ़ाती है।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य ममता जायसवाल ने कहा कि स्वर्णप्राशन दवाई बच्चों के शरीर की प्राकृतिक रक्षा प्रणाली को मजबूत करता है जिससे वह बार-बार होने वाले संक्रमण, बुखार और फ्लू से सुरक्षित रहते हैं। परिचय एवं संचालन शशि भूषण मिश्र आचार्य द्वारा किया गया।
इस अवसर पर प्रांतीय पूर्व छात्र संयोजक अनुराग महाराणा, ऋषिकेश कुमार, शशि भूषण मिश्र, साक्षी कुमारी, नेहा कुमारी, मोनालिसा, कविता पाठक, रेणु कुमारी, आभाष कुमार, शुभम कुमार, सुबोध ठाकुर, अमर ज्योति, संजीव ठाकुर आदि उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / बिजय शंकर

