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मिथुन में खुर-मुंह रोग के बचाव के लिए त्परता

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मिथुन में खुर-मुंह रोग के बचाव के लिए त्परता


इटानगर, 21 सितंबर (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश के पशुपालन, पशु चिकित्सा और डेयरी विकास विभाग ने दिबांग घाटी ज़िले में मिथुन में खुर-मुंह रोग के प्रकोप को रोकने के लिए इलाज और बचाव के उपाय तेज़ कर दिए हैं।

ज़िला पशुपालन और पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. डैमो रिबा के अनुसार, इस बीमारी की पहली रिपोर्ट जुलाई 2026 के आखिरी हफ़्ते में मिली थी। जानवरों की मौत की ख़बरों के बाद, दवाइयों और सैंपल इकट्ठा करने वाली किट के साथ पशु चिकित्सा टीमों को भेजा गया और भारत सरकार की विशेषज्ञों की एक टीम ने भी प्रभावित इलाकों का दौरा किया। बाद में, ओडिशा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़ुट एंड माउथ डिज़ीज़ की लैब जांच मेंसीरोटाइप 'ओ' की पुष्टि हुई।

20 सितंबर, 2026 की विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, 21 गांव प्रभावित हुए हैं और 1,402 मिथुन पर इसका असर पड़ा है। इनमें से 1,225 का इलाज किया गया है, जबकि 267 की मौत की सूचना है।

फिलहाल, चार सदस्यों वाली रैपिड रिस्पॉन्स टीम, स्थानीय पशु चिकित्सा कर्मचारियों के साथ मिलकर प्रभावित इलाकों में इलाज, निगरानी और जागरूकता के कामों में सक्रिय रूप से लगी हुई है। डॉ. रिबा ने प्रकोप से निपटने के लिए ज़िले को अतिरिक्त कर्मचारी और पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार और पशुपालन, पशु चिकित्सा और डेयरी विकास निदेशालय की सराहना की।

डॉ. रिबा ने कहा कि विभाग पशुधन का विस्तृत रिकॉर्ड रखता है, जिसमें मिथुन और मवेशियों का परिवार-वार, व्यक्ति-वार और गांव-वार डेटा शामिल है। उन्होंने अपील की कि गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने से बचाने के लिए पशुधन की आबादी और मौत से जुड़े आंकड़ों की पुष्टि आधिकारिक विभागीय रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।

बिमारी से बचाव के मुख्य उपाय के तौर पर टीकाकरण पर ज़ोर देते हुए, उन्होंने पशुपालकों से अपील की कि वे किसानों के घर-घर जाकर साल में दो बार विभाग द्वारा चलाए जाने वाले मुफ़्त नियमित टीकाकरण अभियान के दौरान पूरा सहयोग दें।

विभाग स्थिति पर लगातार नज़र रख रहा है और बीमारी को रोकने तथा दिबांग घाटी के पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए ज़रूरी कदम उठा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी