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बंगाईगांव रिफाइनरी में हिंदी पखवाड़े का सफल समापन

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बंगाईगांव रिफाइनरी में हिंदी पखवाड़े का सफल समापन


बंगाईगांव रिफाइनरी में हिंदी पखवाड़े का सफल समापन


बंगाईगांव रिफाइनरी में हिंदी पखवाड़े का सफल समापन


बंगाईगांव (असम), 01 अक्टूबर (हि.स.)। हिंदी के प्रति जागरूकता, रचनात्मक अभिव्यक्ति और राजभाषा के प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), बंगाईगांव, संयोजक इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, बंगाईगांव रिफाइनरी के तत्वावधान में आयोजित हिंदी पखवाड़ा 2026 विभिन्न गतिविधियों के साथ आज उत्साहपूर्वक सम्पन्न हुआ।

पखवाड़े के दौरान बंगाईगांव, कोकराझार एवं चिरांग क्षेत्र में हिंदी पुस्तक प्रदर्शनियों, सृजनात्मक हिंदी लेखन कार्यशालाओं तथा सदस्य कार्यालयों के लिए विभिन्न साहित्यिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों ने हिंदी को केवल कार्यालयीन कार्यों की भाषा तक सीमित न रखते हुए साहित्य, सृजन और संवाद की भाषा के रूप में स्थापित करने का संदेश दिया।

हिंदी पखवाड़े की सबसे उल्लेखनीय विशेषता रही विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों एवं कार्यालयों में आयोजित हिंदी पुस्तक प्रदर्शनियां। केंद्रीय विद्यालय, कोकराझार; केंद्रीय विद्यालय, न्यू बंगाईगांव; जवाहर नवोदय विद्यालय, चिरांग; जवाहर नवोदय विद्यालय, कोकराझार; आदर्श विद्यालय, सिडली; आदर्श विद्यालय, बिजनी; बंगाईगांव रिफाइनरी; एसएसबी क्षेत्रक मुख्यालय, बंगाईगांव; भारतीय खाद्य निगम, बंगाईगांव; पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे पर्यवेक्षक प्रशिक्षण केंद्र, न्यू बंगाईगांव तथा बंगाईगांव रिफाइनरी टाउनशिप में आयोजित इन प्रदर्शनियों में साहित्य, कविता, कहानी, जीवनी, यात्रा-वृत्तांत और ज्ञान-विज्ञान सहित विभिन्न विषयों की पुस्तकों को प्रदर्शित किया गया।

कार्यशालाओं में कविता, कहानी, संस्मरण, संवाद, अनुभव लेखन तथा अन्य रचनात्मक विधाओं के माध्यम से विचारों को प्रभावी एवं रोचक ढंग से व्यक्त करने के तरीकों पर चर्चा की गई। विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि सृजनात्मक लेखन केवल साहित्यकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति अपने अनुभवों और विचारों को भाषा के माध्यम से रचनात्मक रूप दे सकता है।

इस अवसर पर बंगाईगांव रिफाइनरी के कार्यकारी निदेशक एवं रिफाइनरी प्रमुख नयन कुमार बरुवा ने कहा कि हिंदी पखवाड़े की गतिविधियों का उद्देश्य हिंदी के प्रति केवल औपचारिक जागरूकता पैदा करना नहीं, बल्कि इसके निरंतर और सहज प्रयोग को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि जब हिंदी कार्यालयों के साथ-साथ विद्यालयों, युवा पीढ़ी और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़ती है, तभी राजभाषा का उद्देश्य व्यापक रूप से सार्थक होता है। नराकास, बंगाईगांव के सदस्य सचिव शरद कुमार ने भी अपनी बातें विस्तार से रखीं।

हिन्दुस्थान समाचार / किशोर मिश्रा