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एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस दुनिया की जनस्वास्थ्य के सबसे महत्वपूर्ण समस्याओं में से एक: डॉ. जयंत विश्व शर्मा

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एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस दुनिया की जनस्वास्थ्य के सबसे महत्वपूर्ण समस्याओं में से एक: डॉ. जयंत विश्व शर्मा


गुवाहाटी, 26 अक्टूबर (हि.स.)। हाल के समय में एंटीमाइक्रोबियल दुनिया की जनस्वास्थ्य की सबसे महत्वपूर्ण समस्याओं में से एक बन गई है। एंटीबायोटिक्स का अधिक उपयोग, डॉक्टर की सलाह के बिना दवा का सेवन और निर्धारित इलाज का सही तरीके से पालन न करने के कारण यह समस्या और जटिल होने का खतरा है। यह टिप्पणी ब्रिटेन के मिड यॉर्कशायर हॉस्पिटल्स नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) ट्रस्ट के लीड कंसल्टेंट माइक्रोबायोलॉजिस्ट और संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण विभाग के निदेशक तथा आयरलैंड के लैटरकेनी यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के कंसल्टेंट माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. जयंत विश्व शर्मा ने की है।

आज सोमवार की शाम गुवाहाटी के बेलतला स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित 'एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस एंड पैशेंट सेफ्टी: एट अ ग्लांस' शीर्षक डॉक्टरों की सतत चिकित्सा-शिक्षा कार्यक्रम, संक्षेप में सीएमई में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित होकर डॉ. जयंत विश्व शर्मा ने इस विषय पर सारगर्भित बयान दिया।

ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के डीन प्रोफेसर (डॉ.) भास्कर बरगोहांई, मेडिकल सुपर डॉ. कबीन तिमुंग, डेप्युटी-मेडिकल सुपर (आयुष) डॉ. पंकज कलिता, अन्य रेसिडेंट डॉक्टर, शिक्षक-डॉक्टर, स्नातक स्तर के छात्र और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में डॉ. शर्मा ने एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के संबंध में अपने लंबे चिकित्सा अनुभव और अवलोकन का जिक्र किया। उनके बयान में अस्पताल में संक्रमण, एंटिबायोटिक की प्रभावकारिता में कमी, चिकित्सा प्रणाली की कमजोरियों और संक्रमण नियंत्रण के क्षेत्र में संस्थागत व्यवस्थाओं के महत्व के विषय विशेष रूप से शामिल हैं।

एंटीबायोटिक के बेहिसाब इस्तेमाल के संदर्भ में डॉ. शर्मा ने कहा कि संक्रमण के असली कारण को जाने बिना अगर एंटीबायोटिक का इस्तेमाल किया जाए तो इलाज और जटिल हो सकता है। केवल अच्छी दवा होना ही काफी नहीं है; स्वच्छता, संक्रमण की निगरानी, जरूरत पड़ने पर मरीज को अलग रखना और जवाबदेही भी बहुत जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कुछ बैक्टीरिया ऐसे तरीके से बदल जाते हैं कि सामान्य एंटीबायोटिक उनके खिलाफ असरदार नहीं रहते। ऐसे हालात में संक्रमण का इलाज और मुश्किल हो जाता है।

उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि नए दवाओं के विकास के साथ-साथ अस्पताल और स्वास्थ्य प्रणाली में लगातार निगरानी, संक्रमण रोकथाम और एंटीबायोटिक के समझदारी से इस्तेमाल को सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि डॉ. जयंत विश्व शर्मा असम के एक चिकित्साविज्ञानी, माइक्रोबायोलॉजिस्ट और लेखक हैं। वह असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के बड़े भाई हैं। चिकित्सा विज्ञान के अलावा, वह स्वास्थ्य सेवा, संक्रमण नियंत्रण, अनुसंधान और असमिया भाषा-साहित्य के क्षेत्र में भी जुड़े हैं। डॉ. शर्मा ने ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस में बीस वर्षों से अधिक समय तक कार्य किया है।

इसके अलावा डॉ. जयंत विश्व शर्मा असम हेल्थकेयर को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के एक संस्थापक सदस्य और संगठन के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय