home page

इटानगर में शांतिपूर्ण रहा 24 घंटे बंद का पहला दिन

 | 

इटानगर, 28 मई (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश की राजधानी इटानगर

क्षेत्र में 24 घंटे के बंद का पहला दिन शांतिपूर्ण

ढंग से आज संपन्न हुआ और किसी भी प्रकार की हिंसा या गिरफ्तारी की कोई खबर नहीं

मिली। यह बंद अरुणाचल प्रदेश स्वदेशी युवा संगठन (एपीआईओ) द्वारा राज्य की राजधानी

क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मस्जिदों सहित कथित अवैध निर्माणों के विरोध में सुबह 5 बजे से शुरू किया गया था।

आज सुबह 5 बजे से 29 मई की सुबह 5 बजे तक निर्धारित इस बंद का आह्वान

संगठन ने अवैध निर्माणों और राज्य में कथित तौर पर अवैध प्रवासियों की उपस्थिति के

खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर किया था।

इटानगर के जिला मजिस्ट्रेट ने जबरन बंद के खिलाफ सर्वोच्च

न्यायालय के निर्देशों का हवाला देते हुए बंद को अवैध और गैरकानूनी

घोषित कर दिया है। अधिकारियों ने कहा कि धमकी, सड़क अवरोध या सार्वजनिक सेवाओं में बाधा डालकर बंद लागू करने का

प्रयास करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बंद के दौरान यह देखा गया कि राजधानी क्षेत्र के लगभग सभी सरकारी और निजी कार्यालय, संस्थान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद

रहे और सड़कों पर कुछ ही वाहन चलते दिखाई दिए।

राजधानी क्षेत्र के संवेदनशील स्थानों, जिनमें इटानगर, नाहरलागुन और निरजुली शामिल हैं, में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात किए गए

थे।

बंद ईद के त्योहार के समय हुआ, जो एक राजपत्रित सार्वजनिक अवकाश है, जिसके दौरान देश भर में सरकारी कार्यालय, बैंक और वित्तीय संस्थान बंद रहते हैं।

विरोध प्रदर्शन के समय को लेकर कई लोगों ने आलोचना की और आरोप लगाया कि यह बंद अप्रत्यक्ष

रूप से त्योहार मनाने वाले एक विशेष धार्मिक समुदाय को निशाना बनाकर किया गया था।

हालांकि, एपीआईवाईओ के अध्यक्ष तारो सोनम लियाक

ने धार्मिक भेदभाव के आरोपों का खंडन किया। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा

कि अरुणाचल प्रदेश में कथित अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ संगठन का अभियान

2023 से चल रहा है और इसका उद्देश्य

स्वदेशी समुदायों के जनसांख्यिकीय हितों की रक्षा करना है।

इस बीच, इटानगर के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) तुम्मे आमो ने एपीआईओवाई टीम द्वारा

बुलाए गए बंद पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि बंद कोई समाधान नहीं है; इससे जनता का सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त

हो सकता है, दैनिक जीवन बाधित हो सकता है और राज्य

के विकास पर असर पड़ सकता है। आमो ने कहा, संगठन द्वारा उठाए गए मुद्दे जायज हो सकते हैं, लेकिन सरकार तक ऐसी चिंताओं को

पहुंचाने के लिए बंद का सहारा लेने के बजाय लोकतांत्रिक तरीके उपलब्ध हैं।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी