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जीरो फ़ेस्टिवल ऑफ़ म्यूज़िक का शुभारंभ 24 सितम्बर से

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इटानगर, 21 सितंबर (हि.स.)। चार दिवसीय जीरो फ़ेस्टिवल ऑफ़ म्यूज़िक का 13वां एडिशन इस साल 24 से 27 सितंबर तक चलेगा, अरुणाचल प्रदेश की जीरो वैली में होने वाले इस फ़ेस्टिवल में भांगड़ा-पॉप और रॉक से लेकर फ़िलिस्तीनी-फ़्रेंच इलेक्ट्रॉनिका, आयरिश फ़ोक और नॉर्थ-ईस्ट इंडिया के म्यूज़िक तक की परफ़ॉर्मेंस देखने को मिलेंगी।

इसके साथ ही, इस साल 'ग्राउंड जीरो' पर भारत और अल्जीरिया, थाईलैंड, फ़िलिस्तीन, स्विट्ज़रलैंड, साउथ अफ़्रीका, साउथ कोरिया, नेपाल, आयरलैंड, फ़िलीपींस और श्रीलंका जैसे देशों के 40 से ज़्यादा आर्टिस्ट्स दल अपनी प्रस्तुति देंगे।

एक दिलचस्प खोज त्रिपुरा के स्ट्रीट म्यूज़िशियन सुकेश शुक्लबैद्य हैं, जिन्होंने जीरो के स्टेज तक पहुंचने से पहले दशकों तक सड़क के एक ही कोने पर म्यूज़िक बजाकर गुज़ारा किया।

इंटरनेशनल परफ़ॉर्मर्स में श्रीलंकाई सिंगर योहानी, अल्जीरिया की फ़ाती तेनिरी, आयरिश फ़ोक बैंड साल्टेयर, फ़िलिस्तीनी-फ़्रेंच इलेक्ट्रॉनिक प्रोड्यूसर इसाम एलियास, नेपाल के फ़ॉस्फ़ीन्स, थाईलैंड, फ़िलीपींस के तलाहिब और साउथ कोरिया की जोड़ी मोहर शामिल हैं।

इस फ़ेस्टिवल में 'कॉसमॉस' की भी शुरुआत होगी, जो आर्टिस्ट्स और दर्शकों के बीच अचानक होने वाले सहयोग, बातचीत और म्यूज़िकल मुलाकातों के लिए एक खास, आज़ाद माहौल वाला परफ़ॉर्मेंस स्पेस होगा।

आयरिश बैंड साल्टेयर की मौजूदगी आयरलैंड और जीरो के बीच पहली पार्टनरशिप को भी दिखाती है, जिसमें लोकल म्यूज़िशियन्स के साथ वर्कशॉप और सहयोग शामिल होंगे।

म्यूज़िक के अलावा, इस फ़ेस्टिवल में अपतानी समुदाय भी अहम भूमिका निभाएगा। इसमें पारंपरिक 'दमिंडा' हार्वेस्ट डांस, अपतानी महिला संघ जीरो की परफ़ॉर्मेंस और पारंपरिक 'एलू' धान की बांसुरी और अपतानी पॉटरी पर वर्कशॉप शामिल होंगी।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी