home page

याक और मवेशियों के लिए एआई प्रोग्राम

 | 

इटानगर, 26 सितंबर (हि.स.)। भारतीय सेना ने इंडियन काउंसिल ऑफ़ एग्रीकल्चरल रिसर्च के एनआरसी -याक (डिरांग), अरूणाचल प्रदेश पशुपालन, पशु चिकित्सा और डेयरी विकास विभाग और तवांग ज़िला प्रशासन के साथ मिलकर याक और मवेशियों के लिए आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन (एआई) प्रोग्राम आयोजित किया। यह प्रोग्राम बुमला के पास त्साचिन, तक्तसांग गोंपा के पास कुमरोत्सर और चेमा की ओर मेरा जीजी में चलाया गया।

इस पहल का मकसद याक की आबादी की जेनेटिक क्वालिटी और प्रोडक्टिविटी को बेहतर बनाना और इनब्रीडिंग डिप्रेशन की समस्या को दूर करना है।

लगातार इनब्रीडिंग से शरीर का आकार, दूध का उत्पादन और बीमारियों से लड़ने की क्षमता जैसे गुणों पर बुरा असर पड़ सकता है।

उम्मीद है कि आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन प्रोग्राम से याक के झुंड ज़्यादा स्वस्थ और ज़्यादा प्रोडक्टिव बनेंगे और साथ ही ज़िले में याक की आबादी बढ़ाने की कोशिशों में भी मदद मिलेगी।

आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन की प्रक्रिया को पूरा करने में एनआरसी-याक के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. विजय पॉल और पशुपालन, पशु चिकित्सा और डेयरी विकास विभाग (तवांग) के पशु चिकित्सक शामिल थे।

तवांग के ज़िला पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. थुप्टान ताशी ने ज़िले के ब्रोकपा और याक पालकों से अपील की कि वे आगे आएं और इस मौके का फ़ायदा उठाएं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग पालकों के लिए आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन में काफ़ी खर्च आता है, जबकि यह पहल भारतीय सेना के सहयोग से मुफ़्त में उपलब्ध कराई जा रही है।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक ब्रीडिंग के तरीकों को बड़े पैमाने पर अपनाने से तवांग ज़िले में याक के स्वास्थ्य, प्रोडक्टिविटी और आबादी को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी और ब्रोकपा समुदाय की पारंपरिक याक-पालन आजीविका को बनाए रखने में योगदान मिलेगा।

प्रशासन और संबंधित विभाग तवांग ज़िले के ऊंचे इलाकों में वैज्ञानिक पशुधन प्रबंधन को बढ़ावा देने और याक पालकों की आजीविका का समर्थन करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी