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महिला सुरक्षा और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में यूसीसी महत्वपूर्ण कदम : अभाविप

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महिला सुरक्षा और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में यूसीसी महत्वपूर्ण कदम : अभाविप


गुवाहाटी, 28 मई, (हि.स.)। समाज में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेष रूप से बहुविवाह, बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों के कारण अनेक महिलाएं मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से प्रभावित होती रही हैं, जो समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

उल्लेखनीय है कि 27 मई को असम विधानसभा में ऐतिहासिक समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया गया। इसके साथ ही असम, भारत का तीसरा राज्य तथा पूर्वोत्तर भारत का पहला राज्य बन गया है, जहां यह ऐतिहासिक विधेयक पारित हुआ है।

असम विधानसभा में पारित इस विधेयक का स्वागत करते हुए आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप), असम प्रदेश ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया। संगठन के राज्य सचिव मानस प्रतिम कलिता ने कहा, “यह एक ऐतिहासिक फैसला है। महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक समानता सुनिश्चित करने के लिए सभी नागरिकों के लिए समान कानून आवश्यक है। समान नागरिक संहिता समाज में न्याय और सुरक्षा की नींव को और मजबूत करेगी।”

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज में बहुविवाह, बाल विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप जैसी अपसंस्कृतियों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यूसीसी कानून महिलाओं को अधिक कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ एक स्वस्थ और सुरक्षित समाज के निर्माण में भी सहायक सिद्ध होगा। साथ ही यह कानून महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की रक्षा में सकारात्मक भूमिका निभाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश