विद्या भारती ने किया गुवाहाटी में मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान
गुवाहाटी, 30 अप्रैल (हि.स.)। विद्या भारती की शिशु शिक्षा समिति, असम द्वारा प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय के सभागार में एक गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें राज्यभर के 527 शंकरदेव शिशु निकेतनों के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
शिशु शिक्षा समिति के प्रचार समन्वयक मुकुटेश्वर गोस्वामी ने गुरुवार कोें बताया है कि बीते बुधवार को आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10:30 बजे दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई। शिशु शिक्षा समिति, असम के महासचिव जगन्नाथ राजबंशी ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया और कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर शंकरदेव शिशु निकेतन, पाटाचारकुची के छात्र ज्योतिर्मय दास, जिन्होंने हाई स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एचएसएलसी) परीक्षा में 98.5 प्रतिशत अंक के साथ राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया, को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके अलावा 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले अन्य विद्यार्थियों— तनमय बोरा, निकिता देवी, कौशिक सेनापति, पार्थप्रतिम लहकर, अम्लान भुइयां, तनुस्का पराशर और कृष्णाक्षी कलिता— को भी सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित असम के मुख्य सचिव डॉ. रवि कोटा ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का महत्व बताया। उन्होंने छात्रों को समाज के प्रति जिम्मेदार बनते हुए उत्कृष्टता की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने विद्या भारती के समग्र शिक्षा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में योगदान की सराहना की। इस अवसर पर शंकरदेव एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राणा प्रताप कलिता, प्राग्ज्योतिषपुर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. स्मृति कुमार सिन्हा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
शिशु शिक्षा समिति के प्रचार समन्वयक गोस्वामी ने कहा कि पहली बार पूर्व छात्र संगठन द्वारा असमिया, संस्कृत और संगीत में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले 51 विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया गया। साथ ही शत प्रतिशत परिणाम देने वाले संस्थानों के प्रधानाचार्यों और प्रथम श्रेणी परिणाम प्राप्त कराने वाले शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया।
इससे पूर्व, पूर्व छात्र संगठन के प्रभारी गौरव कलिता ने ‘बिभायन’ मंच के माध्यम से पूर्व छात्रों से एकजुट होकर मातृभाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

