'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' राष्ट्रीय सुरक्षा परियोजना नहीं बल्कि स्थानीय लोगो को बेवकूफ बनाने की परियोजनाः मोयोंग
इटानगर, 05 नवंबर (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर काटन मोयोंग, जिन्हें 'एबोर मैन' के नाम से भी जाना जाता है, ने राज्य सरकार के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया कि 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' एक राष्ट्रीय सुरक्षा परियोजना है। उन्होंने कहा कि यह सियांग क्षेत्र की स्थानीय जनता को बेवकूफ बनाने के लिए सरकार की एक चाल है।
आज यहां अरुणाचल प्रेस क्लब में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, मोयोंग ने कहा कि सियांग नदी पर बांध बनाने का राज्य सरकार का यह पहला प्रयास नहीं है। हम 'आदि' समुदाय के लोग पिछले 47 वर्षों से सियांग नदी पर बांध के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। पहले हमारे पूर्वजों ने इसका विरोध किया था और अब हम इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि राज्य सरकार बार-बार अलग-अलग नाम देकर—जैसे 'राष्ट्रीय हित', 'राष्ट्रीय सुरक्षा', या 'वॉटर बॉम्ब को नियंत्रित करना'—सियांग नदी पर एक विशाल बांध बनाने की कोशिश क्यों कर रही है? उन्होंने कहा कि ये सब राज्य सरकार द्वारा बांध थोपने के लिए गढ़े गए झूठी कहानी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा का कोई मुद्दा नहीं है; यह केवल अरुणाचल प्रदेश के लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश है।
यारलुंग त्सांगपो नदी पर चीन की 60,000 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के बारे में उन्होंने कहा कि इससे भारत पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वह एक सामान्य जलविद्युत परियोजना है।
उन्होंने सरकार द्वारा बार-बार बातचीत करने के प्रयासों की भी आलोचना की और कहा कि अब बातचीत का समय बीत चुका है। उन्होंने नो डैम, (कोई बांध नहीं, ) का नारा दोहराते हुए कहा कि सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि नहीं का मतलब नहीं होता है। उन्होंने सवाल किया कि जब प्रभावित लोगों की आवाज ही नहीं सुनी जा रही है, तो सरकार आखिर किससे सलाह-मशविरा करना चाहती है?
मोयोंग ने कहा कि राज्य सरकार ने अरुणाचल प्रदेश की 26 जनजातियों से सलाह लिए बिना ही जलविद्युत परियोजनाओं के लिए 145 समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे राजनेता और नौकरशाह तो आर्थिक लाभ उठा रहे हैं, जबकि स्थानीय समुदाय काफी हद तक वंचित रह गए हैं।
साथ ही, कहा कि सियांग बांध के मामले में सरकार 'लोगो को बाटंने और राज करो' की नीति अपना रही है। पहले उन्होंने गांवों के बीच बांटने की कोशिश की और अब वे समुदाय और धर्म के आधार पर लोगों को बांटने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने एकता की अपील करते हुए लोगों से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे में जनजातीय या धार्मिक पहचान को न लाएं। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह आंदोलन अरुणाचल प्रदेश के सामूहिक हितों से जुड़ा है।
हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी

