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असम-अरुणाचल सीमा विवाद के स्थायी समाधान की मांग

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इटानगर, 27 अगस्त (हि.स.)। अरुणाचल फ्रंटियर ट्राइबल फ्रंट ने लोअर सियांग जिले के हिमे गांव और पापुम पारे जिले के तारासो में असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा विवाद की हालिया घटनाओं पर गंभीर चिंता जताते हुए जमीन विवाद और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।

आज अरुणाचल प्रेस क्लब में मीडिया से बात करते हुए अरुणाचल फ्रंटियर ट्राइबल फ्रंट के चेयरमैन ताडक नालो ने बताया कि बीते 25 अगस्त को उन्होंने लोअर सियांग जिले के कांगकू सर्कल में हिमे गांव का दौरा किया था, जहां सीमा विवाद को लेकर हाल ही में गोलीबारी की घटना हुई थी और कई लोग घायल भी हुए थे; वे घटना की असल स्थिति जानने वहां गए थे।

उनकी जांच और असम-अरुणाचल प्रदेश सीमा के 'नामसाई घोषणा पत्र' (2023) के ज़मीन रिकॉर्ड के अनुसार, विवादित ज़मीन पूरी तरह से अरुणाचल प्रदेश के लोअर सियांग जिले में आती है और यह जगह असम के बोडोटी गांव से लगभग 6 से 7 किलोमीटर दूर है।

उन्होंने दावा किया कि यह विवाद बहुत पुराना 1976 से चला आ रहा है और इसके कारण कई बार टकराव हुए हैं; जो 10 अगस्त को तनाव और बढ़ गया था, इस बीच गोलीबारी भी हुई थी।

नालो ने यह भी दावा किया कि उनकी जांच में पता चला है कि हिमे गांव के लोगों ने असमा के बोडोटी गांव के लोगों को लगभग 20 बीघा ज़मीन मवेशियों को चराने के लिए इस्तेमाल करने की इजाज़त दी थी, लेकिन उनका मकसद कभी भी ज़मीन दान करना या उसका मालिकाना हक देना नहीं था।

उन्होंने आगे बताया कि 1987 में बोडोटी के लोगों ने कथित तौर पर हिमे गांव वालों को भरोसा दिलाया था कि वे हिमे गांव की ज़मीन पर अपना दावा नहीं करेंगे। हालांकि, यह मुद्दा अनसुलझा ही रहा और समय-समय पर तनाव फिर से बढ़ता रहा।

ग्रामीणों के साथ बैठक के दौरान, नालो ने कहा कि उनकी टीम ने ज़मीनी हालात की जानकारी जुटाई और पाया कि कई हिमो गांव के निवासी डर के साये में जी रहे हैं। उनके अनुसार, कुछ ग्रामीण अपनी सुरक्षा और आगे और हमलों की आशंका के कारण रात में गांव की चौकीदारी भी करनी पड़ रही है।

नालो ने यह भी बताया कि हिमे गांव ही एकमात्र ऐसा इलाका नहीं है जहां सीमा और ज़मीन से जुड़ी चिंताएं हैं; उन्होंने पापुम पारे जिले के तारासो सर्कल में भी ऐसी ही समस्याओं का ज़िक्र किया। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि वह इन इलाकों पर भी ध्यान दे और ऐसे विवादों को बढ़ने से रोकने के लिए समय रहते कदम उठाए।

उन्होंने अरुणाचल प्रेदश के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखकर तुरंत दखल देने की मांग की है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया है कि हिमे मामले को अरुणाचल प्रदेश और असम के बीच टकराव के तौर पर नहीं, बल्कि दो गांवों के बीच ऐसे अनसुलझे विवाद के तौर पर देखा जाना चाहिए, जिसके लिए स्थायी प्रशासनिक और कानूनी समाधान की ज़रूरत है।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी