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कोकराझार में मनाया गया शिल्पी दिवस

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कोकराझार में मनाया गया शिल्पी दिवस


कोकराझार (असम), 17 जनवरी (हि.स.)। पूरे राज्य के साथ आज कोकराझार जिला प्रशासन द्वारा कोकराझार विश्वविद्यालय के एमएमबी ऑडिटोरियम में शिल्पी दिवस मनाया गया। यह आयोजन असमिया कला, संस्कृति और समाज को अतुलनीय योगदान देने वाले महान सांस्कृतिक व्यक्तित्व रूपकोंवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की पुण्यतिथि (17 जनवरी, 1951) के उपलक्ष्य में किया गया। इस अवसर पर उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई और उनके योगदान को स्मरण किया गया।

कार्यक्रम में कोकराझार के आयुक्त पंकज चक्रवर्ती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद, कलाकार, बुद्धिजीवी, विशिष्ट नागरिक एवं छात्र-छात्राएं शामिल हुए।

सभा को संबोधित करते हुए आयुक्त ने शिल्पी दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि रूपकोंवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल केवल एक कलाकार, कवि, गीतकार, फिल्म निर्माता, गायक और अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने असम में एक संतुलित एवं प्रगतिशील समाज के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि रूपकोंवर के विचार अपने समय से कहीं आगे थे और आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने सीमित संसाधनों और अनेक निराशाओं के बावजूद पहली असमिया फिल्म ‘जॉयमोती’ के निर्माण में रूपकोंवर के दृढ़ संकल्प को याद किया, जिसने असमिया सिनेमा की नींव रखी, तथा कला और संस्कृति के प्रति उनके नवोन्मेषी और निर्भीक दृष्टिकोण की सराहना की।

अपने संबोधन के अंत में आयुक्त ने सभी कलाकारों, विद्वानों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि रूपकोंवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल के जीवन और कृतित्व का निरंतर अध्ययन एवं चिंतन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

इस अवसर पर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें ज्योति संगीत की सामूहिक प्रस्तुति, नृत्य प्रदर्शन तथा कविता पाठ शामिल थे, जो रूपकोंवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की समृद्ध रचनात्मक विरासत को दर्शाते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / किशोर मिश्रा