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सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्टः सिफ्फ ने दी आंदोलन की चेतावनी

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इटानगर, 10 अक्टूबर (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम (सिफ्फ) ने शनिवार को प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (सुमप) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में हिरासत में लिए गए पांच लोगों को रिहा करने के लिए आज शाम 5 बजे की समय-सीमा तय की और चेतावनी दी कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वे नया आंदोलन शुरू करेंगे।

सिफ्फ के प्रवक्ता टागोरी माइज़ ने अरुणाचल प्रेस क्लब में मीडिया को सम्बोधित करते हुए कहा कि अगर तय समय-सीमा के भीतर हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा नहीं किया गया तो गेकू यूथ कमेटी लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करेगी।

फोरम ने बांध से प्रभावित इलाकों से सेना के जवानों सहित सुरक्षा बलों को तुरंत हटाने, ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज शिकायत वापस लेने और हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को बिना शर्त रिहा करने की भी मांग की।

उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन पर प्रभावित समुदायों से सलाह-मशविरा न करने का आरोप लगाया। साथ ही कहा कि सरकार ने ग्रामीणों से बातचीत और ज़मीन के मालिक से अनुमति लेने जैसी बुनियादी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया और ग्रामीणों को ठीक से सूचित किए बिना ही प्रोजेक्ट से जुड़ी गतिविधियां शुरू कर दीं।

उन्होंने कहा, लोगों को सूचित किया जाना चाहिए था, अनुमति ली जानी चाहिए थी, लेकिन इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उग्गेंग गांव का उदाहरण देते हुए माइज़ ने दावा किया कि जब तक साइट टेस्टिंग के लिए ड्रिलिंग का काम शुरू नहीं हुआ, तब तक गांव के मुखिया (गांव बूढ़ा) भी प्रस्तावित प्रोजेक्ट के बारे में नहीं जानते थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों में जागरूकता की कमी, पारदर्शिता का अभाव और प्रभावित समुदायों को शामिल न करने के कारण इलाके में नाराज़गी और अशांति फैल गई है।

उग्गेंग में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन से निपटने के तरीके की निंदा करते हुए माइज़ ने कहा कि पुलिस लाठीचार्ज से कथित तौर पर लगी चोटों और संपत्ति के नुकसान की ज़िम्मेदारी प्रशासन को लेनी चाहिए।

बातचीत के लिए सरकार की अपील पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों की तैनाती, ग्रामीणों को हिरासत में लेने और एफआईआर दर्ज करने से लोगों का भरोसा और कम हुआ है।

उन्होंने कहा, सरकार हमारे इलाकों में सुरक्षा बल तैनात करती है, ग्रामीणों को हिरासत में लेती है और हमारे खिलाफ एफआईआर दर्ज करती है, फिर भी हमसे बातचीत के लिए आगे आने की उम्मीद करती है।

माइज़ ने पूछा, वे हमसे बातचीत की उम्मीद कैसे कर सकते हैं जब उनके कामों से लोगों के बीच अविश्वास पैदा हो रहा है? सरकार और प्रभावित समुदायों के बीच बिगड़ते रिश्तों पर निराशा ज़ाहिर करते हुए उन्होंने कहा, सरकार पर हमारा भरोसा कम हो गया है।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी