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गुवाहाटी में मशरूम अनुसंधान पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

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गुवाहाटी में मशरूम अनुसंधान पर दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न


गुवाहाटी, 24 जून (हि.स.)।

गुवाहाटी के खानापारा स्थित असम पशु चिकित्सा और मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित मशरूम खेती परियोजना पर दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी और कार्यशाला का बुधवार की शाम सफल समापन हो गया। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित मशरूम अनुसंधान निदेशालय के तहत 'अखिल भारतीय समन्वित मशरूम अनुसंधान परियोजना' के सौजन्य से और असम कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से मंगलवार से आयोजित किया जा रहा था।

इस सम्मेलन में उत्तर-पूर्व क्षेत्र में मशरूम उत्पादन की संभावनाओं और चुनौतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।

डॉ. संजय कुमार चेतिया (निदेशक, असम कृषि विश्वविद्यालय का अनुसंधान विभाग) ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि उत्तर-पूर्व में पहली बार इस विशेष वार्षिक कार्यशाला का आयोजन किया गया है। इसके लिए उन्होंने आईसीएआर को धन्यवाद दिया।

विशेष अतिथि के रूप में शामिल होते हुए असम पशु चिकित्सा और मत्स्य विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि वर्तमान में राज्य के कई किसानों ने मशरूम की खेती को जीविकोपार्जन के एक लाभदायक साधन के रूप में अपनाया है।डॉ. सुधाकर पांडे (अतिरिक्त महानिदेशक, आईसीएआर नई दिल्ली) ने जानकारी दी कि इस अनुसंधान समूह ने विभिन्न प्रकार के मशरूम के लिए गुणवत्ता-आधारित उत्पादन प्रोटोकॉल तैयार किया है।

डॉ. दीपज्योति राजखोवा (कुलपति, असम कृषि विश्वविद्यालय) ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए कहा कि उत्तर-पूर्व में मशरूम की 700 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से लगभग 340 प्रजातियां अकेले असम में उपलब्ध हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि मशरूम का शेल्फ-लाइफ (सुरक्षित रखने की अवधि) बहुत कम होना एक चिंता का विषय है।

उद्घाटन समारोह के हिस्से के रूप में विभिन्न मशरूम अनुसंधान केंद्रों द्वारा प्रकाशित कई वैज्ञानिक पुस्तिकाओं और एक विशेष स्मारिका का विमोचन किया गया। इसके अलावा, संगोष्ठी के साथ तालमेल बिठाते हुए मशरूम की एक आकर्षक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई।

दो दिवसीय कार्यशाला में देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 30 मशरूम अनुसंधान केंद्रों के 40 वैज्ञानिकों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान कई ग्रुप बैठकें भी आयोजित की गईं।

बुधवार को अंतिम दिन असम के मशरूम उत्पादकों, वैज्ञानिकों और व्यापारियों के बीच एक त्रिपक्षीय विचार-विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में असम के प्रसिद्ध मशरूम उत्पादक और 'मशरूम डेवलपमेंट फाउंडेशन' के संस्थापक प्रांजल बरुवा सहित लगभग 40 स्थानीय मशरूम किसान, व्यापारी और उद्यमी उपस्थित रहे और उन्होंने अपने अनुभवों व समस्याओं पर चर्चा की।---------------

हिन्दुस्थान समाचार / देबजानी पतिकर