कोकराझार में बाघिन की मौजूदगी के चलते धारा 163 लागू
कोकराझार (असम), 3 नवम्बर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल से भटककर असम के कोकराझार जिले के दोतमा राजस्व सर्किल अंतर्गत गेलेगुरी गांव के जंगल से सटे इलाके में पहुंची एक मादा रॉयल बंगाल टाइगर (बाघिन) की मौजूदगी के बाद जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। जिला दंडाधिकारी पंकज चक्रवर्ती ने जनसुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 163 के तहत तत्काल प्रभाव से निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
कचुगांव वन प्रमंडल के प्रभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) की रिपोर्ट के अनुसार, 2 नवंबर, 2026 से गेलेगुरी गांव के जंगल से सटे इलाके में बाघिन की गतिविधियां देखी जा रही हैं। बाघिन की मौजूदगी से आम लोगों और मवेशियों की सुरक्षा को संभावित खतरे तथा घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जुटने, अफवाह फैलने और वन विभाग के पकड़ने के अभियान में बाधा उत्पन्न होने की आशंका को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। बाघिन को सुरक्षित पकड़ने के लिए वन विभाग, भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की टीमें अभियान में जुटी हैं।
प्रशासनिक आदेश के अनुसार, गेलेगुरी गांव को केंद्र मानकर पांच किलोमीटर के दायरे को निषेधाज्ञा एवं बफर जोन घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में गेलेगुरी, ईस्ट बोंगशीगांव, वेस्ट डांगरखुटी, नॉर्थ भालुकमारी, साउथ दक्षिण डांगरखुटी और घोरामारी गांव शामिल हैं।
निषेधाज्ञा के तहत बाघिन को देखने या उसका पीछा करने के उद्देश्य से पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया गया है। प्रभागीय वन अधिकारी, हल्टुगांव अथवा कछुगांव वन प्रमंडल की अनुमति के बिना पांच किलोमीटर के दायरे में जंगल और वन क्षेत्रों में आम लोगों के प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई है।
इसके अलावा आग्नेयास्त्र, दाव (पारंपरिक धारदार हथियार), भाले, जाल, फंदे और जहर लेकर चलने, पटाखे फोड़ने, ढोल-नगाड़े बजाने, लाउडस्पीकर का इस्तेमाल करने तथा आग जलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। बाघिन का पता लगाने के लिए फ्लैशलाइट का इस्तेमाल, निजी ड्रोन उड़ाने और वन विभाग के अभियान की बिना अनुमति वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी करना भी प्रतिबंधित रहेगा।
प्रशासन ने सोशल मीडिया पर बाघिन को आदमखोर बताने अथवा उसे गोली मार दिए जाने जैसी भ्रामक खबरें और अफवाहें फैलाने पर भी रोक लगाई है।
हालांकि, इन प्रतिबंधों से असम वन विभाग की कैप्चर टीम, पशु चिकित्सा दल, एनटीसीए और डब्ल्यूआईआई के विशेषज्ञों, पुलिस, मजिस्ट्रेट, एसडीआरएफ, ड्यूटी पर तैनात वन सुरक्षा बल के जवानों तथा कानून-व्यवस्था एवं सूचना प्रसारण कार्यों में लगे सरकारी अधिकारियों को छूट दी गई है। इसके अलावा जिला दंडाधिकारी अथवा प्रभागीय वन अधिकारी द्वारा विशेष रूप से अधिकृत व्यक्तियों को भी अभियान में प्रवेश की अनुमति होगी।
यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है और प्रभागीय वन अधिकारी द्वारा अभियान समाप्त घोषित किए जाने तक प्रभावी रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 223 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जिला प्रशासन ने प्रभावित गांवों एवं आसपास के क्षेत्रों के निवासियों से निषेधाज्ञा का सख्ती से पालन करने, बाघिन से सुरक्षित दूरी बनाए रखने तथा अभियान स्थल पर भीड़ नहीं लगाने की अपील की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आम लोगों की सुरक्षा और बाघिन को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए सभी का सहयोग आवश्यक है।
हिन्दुस्थान समाचार / किशोर मिश्रा

