पूर्वोत्तर में संघ के कार्यों पर रचित पुस्तक ग्रीट एंड ग्लोरी का विमोचन
गुवाहाटी, 26 सितंबर (हि.स.)। राजधानी दिसपुर स्थित नेड्फी हाउस में आज प्राची प्रकाशन, गुवाहाटी द्वारा प्रकाशित एवं लेखक अभिजीत जोग द्वारा रचित अंग्रेजी पुस्तक ग्रीट एंड ग्लोरी का विमोचन एक भव्य कार्यक्रम में किया गया। इस पुस्तक में पूर्वोत्तर में प्रतिकूल स्थिति के बावजूद प्रचारकों के निःस्वार्थ राष्ट्र सेवा के भाव के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का विस्तार किन परिस्थितियों में हुआ, उसका पूरा दस्तावेज है।
पुस्तक में पूर्वोत्तर की सुरक्षा एवं सभ्यता, संस्कृति, इतिहास, घुसपैठ, धर्मांतरण जैसी कठिन परिस्थिति को रोकने के लिए आरएसएस के प्रचारकों ने किन विकट समस्याओं का सामने करते हुए प्रयास किए, इसका भी वर्णन लगभग 175 पूर्व प्रचारकों से लिए गए साक्षात्कार के आधार पर लिखा गया है।
पुस्तक का विमोचन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व आईएएस अधिकारी राजीव कुमार बोरा एवं संघ के वरिष्ठ प्रचारक हरिभाउ मिरासदार, वरिष्ठ प्रचारक उल्लास कुलकर्णी, वरिष्ठ पत्रकार नव ठाकुरिया आदि ने किया।
मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में कहा कि शुरुआती दिनों में संघ के सामने अनेकों चुनौतियां आईं। विभिन्न संगठनों द्वारा प्रचारकों के कार्यों में अवरोध पैदा किये गये। इस बीच कई प्रचारकों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर में घुसपैठ, धर्मांतरण एवं स्थानीय जनजातियों की परंपराओं को संरक्षित करने के लिए अनकों प्रचारकों एवं स्वयंसेवकों ने अपना उल्लेखनीय योगदान दिया।
वहीं, वरिष्ठ प्रचारक मिरासदार ने पूर्वोत्तर में संघ के शुरुआती दिनों में कार्य आरंभ करने और उससे होने वाले परिवर्तन का जिक्र करते हुए पुस्तक में इसका उल्लेख होने की बात कही। उन्होंने कहा कि 1946 में संघ का कार्य सबसे पहले गुवाहाटी में आरंभ हुआ। हालांकि, कार्य की गति लंबे समय तक काफी धीमी रही। उन्होंने 21 जनवरी, 2018 को गुवाहाटी के खानापाड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि उस कार्यक्रम के बाद संघ के कार्य में काफी तेजी से परिवर्तन दिखने लगा। जिसमें सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक परिवर्तन का असर दिखने लगा। उन्होंने कहा कि पहले पूर्वोत्तर से आंदोलन, हिंसा की खबरें ही आती थीं, लेकिन अब विकास, संस्कृति, सामाजिक गतिविधियों से संबंधित खबरें दिखती हैं। उन्होंने कहा कि पुस्तक में 175 प्रचारकों से लिए गये साक्षात्कार का जिक्र एवं 11 प्रचारकों के बलिदान का जिक्र किया गया है।
वरिष्ठ प्रचारक कुलकर्णी ने अपने संबोधन में कहा कि पुस्तक में केवल संघ की गाथा ही नहीं बल्कि, इसमें असम के महान इतिहास, संस्कृति, आध्यात्मिक यात्रा की भी चर्चा है। उन्होंने पूर्वोत्तर में संघ के सामने पूर्व में आई चुनौतियों की कड़ी में कहा कि पूर्वोत्तर के नगालैंड, मिजोरम आदि राज्यों में यह नैरेटिव आम है कि अंग्रेजों के आने से पहले यहां के लोग हेड हंटर्स थे। जबकि, यह सत्य नहीं है। असम के महान संत श्रीमंत शंकरदेव की भक्तिधारा ने पूरे पूर्वोत्तर को आलोकित किया था। ऐसे में अंग्रेजों ने जान-बूझकर लोगों को मानसिक रूप से उनके इतिहास को भूलने के लिए विवश कर दिया। उन्होंने अनेकों उदाहरणों के जरिए पूर्वोत्तर के राज्यों को भारत से अलग देखने के लिए विभिन्न प्रकार के गढ़े गये नैरेटिव का पर्दाफास किया। साथ ही ऐसे नैरेटिव के कारण संघ को काफी विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि शुरुआत में संघ को अछूत की तरह से देखा जाता था। कारण गांधी की हत्या के नैरेटिव को संघ पर थोप दिया गया।
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार ठाकुरिया ने भी पूर्वोत्तर एवं भारत को अलग देखने को मानसिकता का पर्दाफास करते हुए एक भारत की बात कही। उन्होंने विभिन्न उपाख्यानों के जरिए पूर्वोत्तर के पिछले कार्यकाल एवं वर्तमान में विकसित असम एवं पूर्वोत्तर राज्यों पर प्रकाश डाला।--------------
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

