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सुबनसिरी-कामले जिलों का पुनः सीमांकन की मांग

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इटानगर, 06 जून (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री तंगा ब्यालिंग ने शनिवार को राज्य सरकार से अपर सुबनसिरी और कामले जिलों के बीच सीमांकन की पुनः जांच करने और उसे पुनः अधिसूचित करने की अपील की।

दोनों जिलों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद पर चिंता जताते हुए ब्यालिंग ने कहा कि गृह विभाग द्वारा 27 मई, 2020 को जारी अधिसूचना की गहन समीक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने आज अरुणाचल प्रेस क्लब में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए यह बातें कही।

उन्होंने यह भी दावा किया कि लिगु और लिरुक गांवों को अरुणाचल प्रदेश (जिलों का पुनर्गठन) अधिनियम 1980 और 2017 के तहत आधिकारिक तौर पर कामले जिले में शामिल किया गया था, लेकिन 2020 की अधिसूचना के तहत कथित तौर पर सिगुम रिजो, दिलीदी कॉलोनी, सिन्यिक कॉलोनी, पावर ग्रिड कॉलोनी, शांति कॉलोनी और लिडू कॉलोनी सहित कई अन्य क्षेत्रों और कॉलोनियों को कामले जिले के अधिकार क्षेत्र में लाया गया है, जबकि इनका ऐतिहासिक संबंध ऊपरी सुबनसिरी जिले से है।

ब्यालिंग ने कहा कि जो गांव प्राचीन काल से अपर सुबनसिरी का हिस्सा रहे हैं, उन्हें अलग नहीं किया जाना चाहिए और उन्होंने सरकार से अंतर-जिला सीमा के भौतिक सीमांकन के लिए एक पारदर्शी और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य प्रक्रिया शुरू करने का आग्रह किया।

उन्होंने सरकार से यह भी अपील की कि सीमा विवाद से प्रभावित लगभग 4,000 से 6,000 निवासियों को चल रही विशेष गहन समीक्षा (एसआईआर) प्रक्रिया से वंचित न रखा जाए।

उन्होंने बताया कि गृह विभाग की 2020 की अधिसूचना में कथित तौर पर रागा पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र को कामले जिले के सिगिन नदी तक बढ़ा दिया गया है। उन्होंने दोनों जिलों के उपायुक्तों से राजपत्रित अधिसूचना की संयुक्त रूप से समीक्षा करने और निष्पक्ष एवं पारदर्शी सीमांकन प्रक्रिया चलाने का आग्रह किया।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी