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राष्ट्र सेविका समिति की गौरवशाली 90 वर्षों की यात्रा

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राष्ट्र सेविका समिति की गौरवशाली 90 वर्षों की यात्रा


राष्ट्र सेविका समिति की गौरवशाली 90 वर्षों की यात्रा


गुवाहाटी, 03 नवंबर (हि.स.)। राष्ट्र सेविका समिति की गौरवशाली 90 वर्षों की यात्रा के मद्देनजर लगातार कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। असम में भी विभिन्न प्रकार के आयोजन हो रहे हैं। आयोजनों के जरिए राष्ट्र निर्माण एवं नारी सशक्तिकरण की दिशा में कार्य किये जा रहे हैं।

गुवाहाटी महानगर राष्ट्र सेविका समिति के एक पदाधिकारी ने आज बताया कि बीते रविवार को गुवाहाटी महानगर राष्ट्र सेविका समिति द्वारा केदार रोड स्थित बॉटनिकल गार्डन में समिति की गौरवशाली 90 वर्षों की यात्रा के उपलक्ष्य में सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक जागरण एवं महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में समिति के योगदान को स्मरण करते हुए उसकी उपलब्धियों का उत्सव मनाया गया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में ज्योत्सना दास सैकिया, प्राचार्य, पीसीपीएच गर्ल्स पॉलिटेक्निक, उपस्थित रहीं, जबकि राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय कार्यवाहिका सुनीता हल्देकर ने मुख्य वक्ता के रूप में सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलमय अस्त्र पूजन के साथ हुआ। यह पारंपरिक अनुष्ठान शक्ति, साहस, अनुशासन एवं धर्मनिष्ठा की भावना का आह्वान करता है।

अपने संबोधन में सुनीता हल्देकर ने संगठन के दर्शन, ऐतिहासिक यात्रा तथा राष्ट्र निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेविका समिति का कार्य मूलतः राष्ट्र निर्माण अर्थात एक सशक्त, एकजुट एवं सांस्कृतिक चेतना से संपन्न राष्ट्र का निर्माण करना है। अमर भारतवर्ष की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय एकता, सामूहिक प्रतिबद्धता एवं साझा उद्देश्य के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ (सभी सुखी एवं समृद्ध हों) की भावना को मार्गदर्शक सिद्धांत बताया।

उन्होंने भारत की समृद्ध सभ्यतागत एवं सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार मुगल एवं ब्रिटिश काल सहित विभिन्न आक्रमणों और विदेशी शासन के बावजूद हिंदू संस्कृति एवं परंपराएँ अक्षुण्ण बनी रहीं। उन्होंने रामकृष्ण परमहंस एवं स्वामी विवेकानंद जैसे महान आध्यात्मिक एवं राष्ट्रीय विभूतियों के योगदान का उल्लेख किया। विशेष रूप से स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायी संदेश तथा समाज एवं राष्ट्र के उत्थान हेतु उनके चार मार्गदर्शक मंत्रों पर प्रकाश डाला। उन्होंने पंच परिवर्तन की महत्ता तथा भारत के उत्तर से दक्षिण तक भारत भक्ति एवं राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

संगठन की ऐतिहासिक विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के आदर्शों एवं संगठनात्मक स्वरूप से प्रेरित होकर राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना वर्ष 1936 में महाराष्ट्र के वर्धा में लक्ष्मीबाई केलकर के दूरदर्शी नेतृत्व में हुई थी। उन्होंने समिति की 90 वर्षों की यात्रा तथा अनुशासित, आत्मविश्वासी एवं सामाजिक रूप से उत्तरदायी महिलाओं के निर्माण में उसके निरंतर योगदान को विस्तार से प्रस्तुत किया।

समिति की शाखा पद्धति, प्रार्थना एवं संगठनात्मक गतिविधियों के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि समिति महिलाओं के मानसिक, शारीरिक एवं आध्यात्मिक सामर्थ्य को विकसित कर उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण हेतु कार्य करती है। उन्होंने सुशीला एवं सुधीरा के आदर्शों, राष्ट्रभक्ति की भावना तथा समर्पित एवं जागरूक महिलाओं के माध्यम से तेजस्वी भारत के निर्माण की परिकल्पना का भी उल्लेख किया।

हल्देकर ने मातृशक्ति के प्रति व्यापक जागरूकता उत्पन्न करने की आवश्यकता पर विशेष बल देते हुए महिलाओं की अपार क्षमता को सामाजिक परिवर्तन एवं राष्ट्रीय विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने सभी से ‘उठो भारत, जागो भारत’ की भावना को आत्मसात कर एक सशक्त, एकजुट एवं जागृत राष्ट्र के निर्माण हेतु सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान किया। अपने संबोधन का समापन उन्होंने राष्ट्रभक्ति के उद्घोष ‘वंदे मातरम्’ के साथ किया।

मुख्य अतिथि ज्योत्सना दास सैकिया ने अपने संबोधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स एवं डिजिटल तकनीक के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए युवा पीढ़ी को तकनीकी प्रगति के साथ कदम मिलाकर चलने तथा उभरते अवसरों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल शारीरिक आत्मरक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि प्रत्येक बालिका को इतना सक्षम, आत्मविश्वासी एवं दक्ष होना चाहिए कि वह समाज की चुनौतियों का स्वतंत्र रूप से सामना कर सके।

उन्होंने युवा महिलाओं से समकालीन सामाजिक चुनौतियों, जिनमें ‘लव जिहाद’ से संबंधित चिंताएं भी शामिल हैं, उनके प्रति सजग एवं जागरूक रहने का आह्वान किया। उन्होंने सूचित निर्णय लेने, व्यक्तिगत सुरक्षा एवं सामाजिक जागरूकता के महत्व पर बल दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु तथा ‘मिसाइल वुमन ऑफ इंडिया’ के नाम से प्रसिद्ध डॉ. टेसी थॉमस जैसी प्रतिष्ठित महिला उपलब्धि प्राप्तकर्ताओं से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने बालिकाओं को बड़े सपने देखने, अपनी क्षमता पहचानने तथा समर्पण एवं दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

अपने संबोधन के समापन में सैकिया ने बालिकाओं को समय का सदुपयोग करने तथा प्रत्येक अवसर का उपयोग शिक्षा, आत्म-विकास एवं राष्ट्र निर्माण के लिए करने हेतु प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षित, आत्मविश्वासी एवं सशक्त महिलाएँ एक प्रगतिशील, सुदृढ़ एवं मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिए अनिवार्य हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय