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एएफटीएफ ने सरकार विरोध रैली आयोजित करने का लिया निर्णय

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इटानगर, 03 जुलाई (हि.स.)। अरुणाचल फ्रंटियर ट्राइबल फ्रंट (एएफटीएफ) ने राज्य सरकार के खिलाफ चरणबद्ध तरीके से लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है। उनकी मुख्य मांग राज्य में नौकरी भर्ती के लिए 80:20 अनुपात को खत्म करना है।

अरुणाचल फ्रंटियर ट्राइबल फ्रंट के चेयरमैन ताडक नालो ने आज अरुणाचल प्रेस क्लब में मीडिया से बात करते हुए राज्य सरकार द्वारा उनकी मुख्य मांग (नौकरी भर्ती में 80:20 अनुपात को खत्म करने) पर कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर नाराजगी जताई।

इसलिए, उन्होंने 11 जुलाई को इटानगर में आकाशदीप बाजार से टेनिस कोर्ट, आईजी पार्क तक एक बड़ी विरोध रैली आयोजित करने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा कि हम लगातार अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं और मुख्यमंत्री पेमा खांडू से इस मामले पर चर्चा के लिए समय की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला है। यह मामला बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य में बेरोजगारी दिन-ब-दिन बढ़ रही है और बाहरी लोग 20 प्रतिशत अनारक्षित कोटे का फायदा उठा रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि अधिकारी नौकरी भर्ती के 80:20 अनुपात के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। हमने देखा है कि कुछ जगहों पर 50:50 अनुपात का इस्तेमाल किया जा रहा है और जब हमने सवाल उठाया तो अधिकारियों ने कई ऐसे स्पष्टीकरण दिए जो प्रासंगिक नहीं थे और सरकार मामले को नजरअंदाज कर रही है।

राजधानी क्षेत्र में हाल ही में आयोजित अरुणाचल प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड की परीक्षा का जिक्र करते हुए, नालो ने दावा किया कि लगभग 54,000 उम्मीदवारों में से करीब 35,000 गैर-अरुणाचली उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। वे बिना इनर लाइन परमिट के राज्य में आए थे। जब हमने गृह विभाग और बोर्ड के चेयरमैन सहित संबंधित अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठाया, तो उनके पास कोई ठोस जवाब नहीं था। यह हमारे लिए बड़ी चिंता का विषय है; यह न केवल इनर लाईन परमिट का उल्लंघन है, बल्कि नौकरी भर्ती में गैर-अरुणाचली उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या भी हमारे लिए चिंता का कारण है।

उन्होंने कहा कि हम 80:20 अनुपात को खत्म करके ही गैर-अरुणाचली उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या को कम कर सकते हैं, लेकिन राज्य सरकार इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ले रही है, जबकि दूसरी ओर राज्य में बेरोजगारों की संख्या बढ़ रही है।

वहीं, देश के किसी भी पूर्वोत्तर आदिवासी राज्य में ऐसी आरक्षण नीतियां मौजूद नहीं हैं। मिज़ोरम, नगालैंड, मणिपुर, सिक्किम, असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों ने ऐसे उपाय लागू किए हैं, जिनके तहत संबंधित राज्यों के मूल निवासियों के अलावा कोई बाहरी व्यक्ति इन राज्यों द्वारा आयोजित भर्ती परीक्षाओं में भाग भी नहीं ले सकता है।

वहीं अरुणाचल प्रदेश 100 प्रतिशत आदिवासी राज्य है, फिर भी यहां आरक्षण नीति में 80:20 के अनुपात का नियम लागू है। इसके दूरगामी परिणाम राज्य के सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवेश पर असर डाल रहे हैं।

इसके अलावा, नालो ने आम जनता, छात्रों और अभिभावकों से राज्य सरकार के खिलाफ इस विरोध-प्रदर्शन में आगे आने की अपील की है।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी