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असम में रंगाली बिहू की तैयारियां जोरों पर

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गुवाहाटी, 12 अप्रैल (हि.स.)। असम में रंगाली बिहू की तैयारियां पूरे जोश के साथ चल रही हैं। गांव-शहर हर जगह ढोल, पेपा और गोगोना की धुन सुनाई देने लगी है। युवक-युवतियां बिहू नृत्य और हुसरी नृत्य के अभ्यास में व्यस्त हैं। बाजारों में नए कपड़े, गामोछाा और पारंपरिक वस्तुओं की खरीदारी बढ़ गई है। ढोल बनाने और मरम्मत करने वाले कारीगर भी काफी व्यस्त हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए विभिन्न दल लगातार अभ्यास कर रहे हैं। घरों में भी सफाई और पकवान बनाने की तैयारी हो रही है। पूरे वातावरण में उत्साह और उमंग का माहौल बना हुआ है।

इसी बीच बोकाखाट के ढोल मरम्मत करने वाले कारीगर भी व्यस्त नजर आ रहे हैं। बोकाखात के बीडीएम रोड स्थित “मा वाद्य भंडार” में मनपसंद ढोल खरीदने के लिए ढुलियाओं की भीड़ उमड़ रही है।

हालांकि पहले जैसी अधिक भीड़ नहीं है, फिर भी दुकान के मालिक ढुलियाओं को उनकी पसंद का ढोल देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यहां 1,200 रुपये से लेकर 11,000 रुपये तक के ढोल उपलब्ध हैं। ऊपरी और निचले असम (उजनि-नामनि) से आए ढुलिया यहां ढोल खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं।

रंगाली बिहू के अवसर पर बिहू कलाकारों की व्यस्तता भी चरम पर है। आगामी सांस्कृतिक कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए देरगांव के शांति मिलन सांस्कृतिक समूह के अंतर्गत शांति मिलन लोकवाद्य दल अंतिम अभ्यास में जुटा हुआ है। दल के कलाकार विभिन्न जनजातीय लोक वाद्यों को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और मंच पर बेहतरीन प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।

इसी कड़ी में रहा के पहुपुरी क्षेत्र के बच्चों और किशोर-किशोरियों द्वारा गठित “नयनज्योति बिहू हुसरी” दल भी पूरी तरह तैयार हो चुका है।

पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी यह दल विभिन्न मंचों पर बिहू और हुसरी प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। बीते एक महीने से दल के सदस्य लगातार अभ्यास कर रहे हैं, ताकि इस बार भी दर्शकों का दिल जीत सकें।

हिन्दुस्थान समाचार / देबजानी पतिकर