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असम की संस्कृति और सुरक्षा के हित में प्रज्ञा का शत-प्रतिशत मतदान का आह्वान

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गुवाहाटी, 31 मार्च (हि.स.)। आसन्न असम विधानसभा चुनाव में अब केवल कुछ ही दिन शेष रह गए हैं। इस बीच राज्य की वर्तमान परिस्थितियों और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन प्रज्ञा ने एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक अपील जारी की है। इस अपील के माध्यम से राज्य के नागरिकों से असम की पहचान, संस्कृति और सुरक्षा से जुड़े जटिल मुद्दों पर गंभीरता से विचार करते हुए शत-प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है।

इस सार्वजनिक अपील पर दो सौ से अधिक विशिष्ट नागरिकों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें सत्राधिकार, धार्मिक गुरु, कुलपति, कलाकार, साहित्यकार, पूर्व सैन्य अधिकारी, प्राध्यापक और अधिवक्ता शामिल हैं। अपील में विशेष रूप से विभाजन के बाद निचले असम से ऊपरी असम की ओर तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तन को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। बढ़ते प्रवासन के प्रभाव के कारण कई क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को अपने निवास स्थान बदलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उनकी भाषा, संस्कृति और भूमि पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

प्रज्ञा ने इस महत्वपूर्ण चुनावी समय में ठोस निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर देते हुए जनता से ऐसे उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को चुनने का आह्वान किया है, जो असम की जनसंख्या संरचना की रक्षा और स्थानीय लोगों के अधिकारों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध हों। साथ ही, प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के संरक्षण को भी चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनाने पर बल दिया गया है।

अपील में राज्य की नई पीढ़ी को सुरक्षित रखने के लिए नशे और ड्रग्स के खिलाफ कठोर नीतियां अपनाने वाले दलों को समर्थन देने की बात कही गई है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रविरोधी और स्थानीय विरोधी ताकतों द्वारा फैलाए जा रहे दुष्प्रचार के प्रति सतर्क रहने का भी आग्रह किया गया है।

भूमि अधिकारों के मुद्दे पर स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अतिक्रमण मुक्त शासन और स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने वाली नीतियां अपनाना आवश्यक है। शांति और स्थिरता के महत्व को रेखांकित करते हुए अपील में कहा गया है कि असम को हिंसा, बम विस्फोट और बंद जैसे पुराने दौर में लौटने के बजाय एक सक्षम और स्थिर सरकार का चुनाव करना चाहिए।

इसके अलावा, आत्मनिर्भरता, स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन, जैविक कृषि के नियमन और शिक्षा के व्यावसायीकरण जैसे मुद्दों पर भी राजनीतिक दलों की स्पष्ट नीति होने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।

अंत में, राज्य के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सभी मतदाताओं से शत् प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया है। मतदाताओं को चेतावनी दी गई है कि वे नोटा का उपयोग कर अपने बहुमूल्य वोट को व्यर्थ न करें, क्योंकि इससे स्थानीय हितों को परोक्ष रूप से नुकसान हो सकता है। प्रज्ञा ने अपने इस आह्वान में दोहराया है कि असम को एक ऐसी मजबूत और सक्षम सरकार की आवश्यकता है, जो असमिया संस्कृति, स्थानीय भाषा और स्वदेशी लोगों के अधिकारों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध हो।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश