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बाढ़ प्रभावितों की मदद को लेकर सरकार की तत्परता से विपक्ष चिंतित : भाजपा

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बाढ़ प्रभावितों की मदद को लेकर सरकार की तत्परता से विपक्ष चिंतित : भाजपा


गुवाहाटी, 09 अगस्त (हि.स.)। असम में बाढ़ प्रभावितों की सहायता और पुनर्वास के लिए राज्य सरकार की ओर से उठाए जा रहे कदमों को लेकर भाजपा ने विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगाया है। भाजपा प्रवक्ता प्रांजल कलिता ने रविवार को जारी बयान में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा की सक्रियता से कुछ विपक्षी राजनीतिक ताकतें चिंतित हैं और वे बाढ़ पीड़ितों को गुमराह करने का प्रयास कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि रविवार से ऊपरी असम के बाढ़ प्रभावित चराईदेव, शिवसागर और जोरहाट जिलों में बाढ़ से हुए संपत्ति के नुकसान का सर्वेक्षण शुरू किया गया है। सर्वेक्षण को तेज करने के लिए शिक्षकों, गांव प्रधानों और मंडलों को लेकर विशेष दल गठित किए गए हैं। सरकार शुरुआत से ही बाढ़ प्रभावित लोगों को युद्धस्तर पर राहत और सहायता उपलब्ध करा रही है।

भाजपा के अनुसार, चार कैबिनेट मंत्रियों—बिमल बोरा, सुशांत बरगोहाईं, पीयूष हजारिका और केशव महंत—के नेतृत्व में संबंधित क्षेत्रों के विधायक राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं। मुख्यमंत्री भी लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और पुनर्वास के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की गई हैं।

सरकार ने जोरहाट, शिवसागर और चराईदेव के अरुणोदय लाभार्थियों के लिए अतिरिक्त 54 करोड़ रुपये जारी कर प्रत्येक को 2,500 रुपये की सहायता दी है। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित परिवारों को प्रारंभिक चरण में 15,000 रुपये और दूसरे चरण में 10,000 रुपये देने के लिए 112 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

बयान के मुताबिक, विद्यार्थियों के लिए करीब नौ करोड़ रुपये की मुफ्त किताबें, लगभग सात करोड़ रुपये की दो-दो जोड़ी मुफ्त वर्दी तथा करीब 4.50 करोड़ रुपये किताबें खरीदने के लिए जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री राहत कोष से 400 से अधिक सरकारी स्कूलों की मरम्मत और साफ-सफाई के लिए प्रत्येक को दो लाख रुपये दिए गए हैं। तीनों जिलों की सड़कों का पुनर्निर्माण सितंबर से शुरू करने की भी घोषणा की गई है।

भाजपा ने बताया कि बाढ़ में मृत लोगों के निकट संबंधियों को एसडीआरएफ से चार लाख और मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच लाख रुपये, यानी कुल नौ लाख रुपये की सहायता दी जा रही है। प्रभावित परिवारों को चावल, दाल और खाद्य तेल के पैकेट के साथ बिस्तर की चादर, मच्छरदानी, तकिया और आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

प्रांजल कलिता ने आरोप लगाया कि सरकार और आम जनता जब बाढ़ पीड़ितों के दुख-दर्द में सहभागी हैं, तब कुछ राजनीतिक नेता अपने निहित स्वार्थ के लिए लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावितों की परेशानी को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करना विपक्षी नेताओं की हताशा को दर्शाता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश