नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन' ने नए भर्ती नियम 2024 में बदलाव की मांग की
इटानगर, 16 सितंबर (हि.स.)। 'ऑल अरुणाचल प्रदेश कॉन्ट्रैक्चुअल नर्सिंग ऑफिसर्स एसोसिएशन' ने नए भर्ती नियम 2024 में बदलाव की मांग की है। वे चाहते हैं कि कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे नर्सिंग अधिकारियों का ध्यान रखते हुए 70:30 का अनुपात रखा जाए यानी 70% पद कॉन्ट्रैक्ट नर्सों के सीधे समायोजन के लिए हों और 30% नए उम्मीदवारों के लिए हो।
आज अरुणाचल प्रेस क्लब में मीडिया से बात करते हुए, संघ की अध्यक्ष रुमिक अगुम ने राज्य सरकार से 2024 में लागू किए गए नए भर्ती नियमों पर दखल देने की अपील की।
उन्होंने दावा किया कि नए भर्ती नियम 2024 उन 636 कॉन्ट्रैक्ट नर्सों के साथ अन्याय कर रहे हैं जो एनएच के तहत कई सालों से राज्य भर में सेवा दे रही हैं। पहले की व्यवस्था में वरिष्ठता के आधार पर नियमित सरकारी सेवा में समायोजन का प्रावधान था। संगठन का कहना है कि कई अधिकारी मौजूदा व्यवस्था के तहत लगभग 8-9 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं।
लेकिन 6 मार्च, 2024 को अधिसूचित नए भर्ती नियमों में अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से 100% सीधी भर्ती का प्रावधान है। यह नियम काम कर रही नर्सों के लिए उचित नहीं है; इतने सालों तक नौकरी करने के बाद लिखित परीक्षा में नए उम्मीदवारों का मुकाबला करना उनके लिए असंभव है। साथ ही, कड़ी ड्यूटी के कारण परीक्षा की तैयारी करना भी मुमकिन नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्ती या प्रतियोगी परीक्षाओं का विरोध नहीं कर रही हैं। हालांकि, इस बदलाव के दौरान मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को नुकसान नहीं होना चाहिए।
उन्होंने राज्य सरकार को 70:30 भर्ती फॉर्मूला अपनाने का सुझाव दिया, जिसमें 70% भर्ती सीनियरिटी के आधार पर चरणबद्ध तरीके से हो और 30% आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती हो, ताकि सभी योग्य कॉन्ट्रैक्ट नर्सिंग अधिकारियों को समायोजित किया जा सके और नए फ्रेशर्स को भी मौका मिले।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ये 636 नर्सें अब आधिकारिक आयु सीमा पार कर चुकी हैं और मां होने व परिवार की जिम्मेदारियां भी संभाल रही हैं, जिससे नए ग्रेजुएट्स की तुलना में वे काफी नुकसान की स्थिति में हैं।
उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर उन्हें परीक्षा देने के लिए बुलाया जाता है तो राज्य के जिला अस्पतालों में मरीजों के वार्ड कौन संभालेगा। साथ ही, उन्होंने सरकार को कोविड-19 महामारी के दौरान उनकी निःस्वार्थ सेवा की याद दिलाई, जब कई लोगों ने बिना भोजन के लगातार 30 घंटे की शिफ्ट में काम किया था और भारी ड्यूटी के बाद अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में भी बताया।
एसोसिएशन ने महंगाई और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों के काम के बोझ का हवाला देते हुए कम से कम 50,000 रुपये की मासिक सैलरी की मांग की है।
उन्होंने सरकार से अपील की है कि नर्सिंग ऑफिसर्स के लिए आयोग की परीक्षा तब तक रोक दी जाए, जब तक भर्ती नियमों में बदलाव न हो जाए और पहले से काम कर रहे कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के भविष्य के बारे में स्थिति साफ न हो जाए।
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री पेमा खांडू, स्वास्थ्य मंत्री बियूराम वाहगे और स्वास्थ्य विभाग से अपील की है कि वे उनकी चिंताओं पर ध्यान दें और कोई ठोस समाधान निकालें।
हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी

