सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्टः फोरम ने कहा- मांग पूरी नहीं तो बातचीत नहीं
इटानगर, 29 अक्टूबर (हि.स.)। जब तक बांध-विरोधी कार्यकर्ताओं और 'सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम' के सभी हिरासत में लिए गए सदस्यों की बिना शर्त रिहाई, और सियांग क्षेत्र से सुरक्षा बलों को हटाया नही जायेगा तब तक, ये लोग अरुणाचल प्रदेश सरकार से कोई बातचीत नहीं करेंगे। यह बयान 'सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम' के सदस्यों ने दिया है।
फोरम के पदाधिकारियों ने आज बताया है कि यह निर्णय 28 अक्टूबर को अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सियांग जिले के गेकू स्थित 'ताकू डेरे कम्युनिटी हॉल' में हुई एक संयुक्त बैठक के बाद लिया गया' इस बैठक में फोरम, इसके युवा विंग और 'परियोजना से प्रभावित एरिया यूथ एसोसिएशन' के सदस्य शामिल थे।
अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' का विरोध कर रहे संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा है कि जब तक हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को बिना शर्त रिहा नहीं किया जाता और बांध से प्रभावित इलाकों से अर्धसैनिक बलों को नहीं हटाया जाता, तब तक वे मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ कोई बातचीत नहीं करेंगे।
बैठक के दौरान, इन संगठनों ने मांग की कि बांध-विरोधी आंदोलन के सिलसिले में हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाए। साथ ही, उन्होंने प्रभावित इलाकों में तैनात 'सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स' और अन्य अर्धसैनिक बलों को वहां से हटाने की भी मांग की।
सदस्यों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक इस विवादित जलविद्युत परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री के साथ कोई सार्थक बातचीत नहीं हो सकती।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पेमा खांडू के बयानों में दोहरापन दिखता है, इसलिए उन्हें उन पर भरोसा नहीं है। बैठक में संगठन से जुड़े मामलों पर भी चर्चा हुई, जिसमें नोबेंग बुरांग को फोरम का नया अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा गया।
हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी औपचारिक मुहर लगनी बाकी है, और जल्द ही एक शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किए जाने की उम्मीद है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब सियांग क्षेत्र में तनाव बना हुआ है। यहां 11,000 मेगावाट की प्रस्तावित जलविद्युत परियोजना का विरोध हो रहा है। स्थानीय मूल निवासी समुदायों के कुछ वर्गों को डर है कि इस परियोजना से लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा, उनकी आजीविका छिन जाएगी और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ेगा।
इससे पहले, मुख्यमंत्री खांडू ने बातचीत के जरिए प्रभावित समुदायों की चिंताओं को दूर करने की इच्छा जताई थी। उन्होंने विश्वास बहाली के उपायों के तौर पर, सुरक्षा बलों की तैनाती कम करने और दर्ज की गई शिकायत को वापस लेने के प्रस्तावों पर सैद्धांतिक रूप से सहमति भी जताई थी।
हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी

