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गुवाहाटी में ‘विकसित पंचायत’ पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

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गुवाहाटी में ‘विकसित पंचायत’ पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित


गुवाहाटी, 28 सितंबर (हि.स.)। नीति आयोग के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज प्रभाग ने असम सरकार के पंचायती एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में गोलाप बोरबोरा राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान (जीबीएसआईपीआरडी) के सहयोग से सोमवार को गुवाहाटी में ‘विकसित पंचायत : लोगों, स्थानों, संसाधनों और अवसरों को जोड़ना’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की।

कार्यशाला का उद्घाटन असम के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री अतुल बोरा और नीति आयोग के सदस्य (ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज) डॉ. आर. बालासुब्रमणियम ने किया। इस अवसर पर असम के मुख्य सचिव रवि कोटा, नीति आयोग की कार्यक्रम निदेशक डॉ. नीलम पटेल, पंचायती राज मंत्रालय के निदेशक धर्मेंद्र कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल और असम सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव बी. कल्याण चक्रवर्ती ने वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया।

मंत्री अतुल बोरा ने वर्ष 2047 तक पंचायतों को आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनाने पर जोर दिया। उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए नीति आयोग की इस पहल की सराहना की। उन्होंने विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और एकीकृत योजना को विकसित पंचायतों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण बताया।

डॉ. आर. बालासुब्रमणियम ने क्षेत्रवार योजनाओं के बजाय स्थान आधारित योजना प्रणाली अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्थानीय स्तर की योजना में मौजूद कमियों की पहचान, स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने तथा प्रौद्योगिकी के माध्यम से पंचायतों में समन्वय बढ़ाने की जरूरत बताई। उन्होंने सतत विकास से आगे बढ़कर पुनर्योजी विकास पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।

मुख्य सचिव रवि कोटा ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले दो दशक महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) को संस्थागत रूप देने और पंचायत स्तर पर समग्र एवं विकेंद्रीकृत योजना तैयार करने पर जोर दिया।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव रोहित कंसल ने वीबीग्राम-जी के तहत किए जा रहे सुधारों और नई पहलों की जानकारी दी। उन्होंने रोजगार के अवसर बढ़ाने, संपर्क व्यवस्था विकसित करने, सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता की सुविधा सुनिश्चित करने तथा जलवायु अनुकूल गांवों के विकास पर जोर दिया। उन्होंने सभी हितधारकों से 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले ‘रिफॉर्म उत्सव’ में भाग लेने और ग्राम सभाओं में अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

कार्यशाला में विकेंद्रीकृत एवं स्थान आधारित योजना के संवैधानिक प्रावधान, जमीनी स्तर की योजना के लिए क्षमता विकास, पंचायतों के लिए स्थान आधारित योजना के तहत प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान तथा जीपीडीपी प्रक्रिया में स्थान आधारित योजना के एकीकरण सहित चार प्रमुख विषयों पर सत्र आयोजित किए गए।

कार्यशाला में पंचायत स्तर पर स्थान आधारित योजना के लिए कार्य ढांचा तैयार करने, जीपीडीपी में भू-स्थानिक उपकरणों एवं आंकड़ों के उपयोग, राज्य स्तर के नवाचारों के दस्तावेजीकरण तथा ‘विकसित पंचायत’ की अवधारणा को लागू करने के लिए व्यावहारिक नीतिगत सुझाव तैयार करने पर भी चर्चा हुई।

जीबीएसआईपीआरडी के निदेशक अनंत कुमार गोगोई ने समापन सत्र में नीति आयोग और पंचायती एवं ग्रामीण विकास विभाग का आभार व्यक्त किया। उन्होंने नीति आयोग के सहयोग से भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने के लिए संस्थान की ओर से हरसंभव सहयोग देने की बात कही।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश