पूसीरे की 22 प्रमुख स्टेशनों पर 'मेरी सहेली' टीम तैनात, 45 ट्रेनों में दैनिक एस्कॉर्ट की सुविधा
-अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई से पूसीरे में महिला यात्रियों की सुरक्षा मजबूत
गुवाहाटी, 14 अक्टूबर (हि.स.)। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) का रेलवे सुरक्षा बल (रेसुब) निरंतर निगरानी, महिलाओं की सुरक्षा पर केंद्रित विशेष पहलों और शिकायतों के त्वरित निवारण के माध्यम से रेल यात्रियों की सुरक्षा मजबूत कर रहा है। महिला यात्रियों, विशेषकर अकेले सफर करने वाली महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके तहत बचाव के उपायों, ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था और जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जा रहा है।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) कपिंजल किशोर शर्मा ने बुधवार को बताया कि महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए ‘मेरी सहेली’ पहल के तहत पूसीरे के 22 प्रमुख स्टेशनों पर विशेष टीमें तैनात की गई हैं। ये टीमें महिला यात्रियों, खासकर अकेले यात्रा करने वाली महिलाओं से संवाद कर उन्हें आवश्यक सहायता प्रदान करती हैं और सुरक्षित एवं आरामदायक यात्रा के लिए आश्वस्त करती हैं।
इसके अलावा, रेसुब के जवान प्रतिदिन पूसीरे की औसतन 45 ट्रेनों में सुरक्षा के लिए एस्कॉर्ट ड्यूटी करते हैं। इनमें 13 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें भी शामिल हैं, जिनमें पुरुष एवं महिला जवानों की संयुक्त टीमें तैनात रहती हैं। इन व्यवस्थाओं से ट्रेनों में सुरक्षा मजबूत हुई है और जरूरतमंद यात्रियों को समय पर मदद मिल रही है।
उन्होंने बताया कि महिला यात्रियों के लिए आरक्षित डिब्बों में अनधिकृत प्रवेश रोकने के उद्देश्य से रेसुब रेल नियमों का उल्लंघन करने वाले पुरुष यात्रियों के खिलाफ नियमित अभियान चलाता है। जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान रेल अधिनियम की धारा 162 के तहत 2,466 लोगों को पकड़कर कार्रवाई की गई। वहीं, 19 जून से 30 सितंबर 2026 के बीच जन विश्वास एक्ट के तहत 219 लोगों को पकड़ा गया और उनसे करीब 4.9 लाख रुपये जुर्माना वसूला गया।
सीपीआरओ ने बताया कि रेसुब की ‘मातृशक्ति’ पहल प्रसव के दौरान सहायता की जरूरत वाली गर्भवती महिला यात्रियों की मदद पर केंद्रित है। इस वर्ष रेसुब के जवानों ने रेल परिसर में प्रसव की दो घटनाओं में सहायता की। इन मामलों में महिला अधिकारियों और जवानों ने समय पर मदद पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
महिला यात्रियों की सुरक्षा और उपलब्ध सहायता सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए रेसुब और पूसीरे के आधिकारिक सोशल मीडिया मंचों पर नियमित रूप से जागरूकता वीडियो भी साझा किए जा रहे हैं।
रेसुब ने बच्चों, महिलाओं और अन्य असुरक्षित लोगों को शोषण से बचाने तथा मानव तस्करी पर अंकुश लगाने के प्रयास भी तेज किए हैं। ‘नन्हे फरिश्ते’ अभियान के तहत जनवरी से सितंबर 2026 के बीच ट्रेनों और रेल परिसरों से 591 बच्चों को बचाया गया। इनमें 387 लड़के और 204 लड़कियां शामिल हैं। ये बच्चे घर से भागे हुए, बिछड़े, बेसहारा या लापता पाए गए थे।
इसी अवधि में मानव तस्करी से जुड़े मामलों में 22 लोगों को बचाया गया। इनमें आठ लड़के, पांच लड़कियां और नौ महिलाएं शामिल थीं। इस दौरान 10 कथित तस्करों को भी पकड़ा गया।
खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन का पता लगाने के लिए रेसुब ने सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर (सीईआईआर) पोर्टल का इस्तेमाल किया। इस माध्यम से कुल 2,437 मोबाइल फोन का पता लगाया गया, जिनमें से 352 बरामद किए गए। इन मामलों में 21 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
रेल परिसरों में उपद्रव और अव्यवस्थित व्यवहार पर अंकुश लगाने के लिए भी अभियान जारी है। वर्ष 2026 के शुरुआती नौ महीनों में रेल अधिनियम की धारा 145 के तहत उपद्रव करने के आरोप में 1,023 लोगों को पकड़कर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
रेसुब यात्रियों की शिकायतों के समाधान के लिए ‘रेल मदद’ के माध्यम से भी सक्रियता से काम कर रहा है। सितंबर 2026 में बल को यात्रियों के सामान छूटने से संबंधित 321 शिकायतें, उपद्रव की 52 शिकायतें और महिला यात्रियों से दुर्व्यवहार की सात शिकायतें मिलीं। इसके अलावा, लापता या संपर्क से बाहर यात्रियों से जुड़े 126 मामले तथा महिलाओं, दिव्यांगों या आरक्षित डिब्बों में अनधिकृत प्रवेश के 27 मामले सामने आए। रेसुब कर्मियों ने इन शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए समस्याओं के समाधान का प्रयास किया।
यात्रियों के सामान की चोरी रोकने के लिए भी कार्रवाई की गई। जनवरी से सितंबर 2026 के बीच चोरी के 434 मामले दर्ज किए गए। इनमें से 241 मामलों का पता लगाया गया और 315 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।
पूसीरे का रेसुब महिला यात्रियों की सुरक्षा, ट्रेनों में नियमित एस्कॉर्टिंग, अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई, जरूरतमंदों के बचाव और शिकायतों के त्वरित निवारण के जरिए रेल यात्रा को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इन प्रयासों में महिलाओं, बच्चों और अन्य असुरक्षित वर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

