पूसीरे (निर्माण) ने 'इन्फ्राबिल्ड नॉर्थ ईस्ट 2026' में रेलवे की प्रमुख अवसंरचना परियोजना को किया रेखांकित
गुवाहाटी, 16 सितंबर (हि.स.)। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (निर्माण) (पूसीरे-नि) के महाप्रबंधक आशीष बंसल ने बुधवार को गुवाहाटी में बुनियादी ढांचे के निर्माण पर आयोजित सम्मेलन-इन्फ्राबिल्ड नॉर्थ ईस्ट 2026 को संबोधित किया। उन्होंने पूर्वोत्तर में चल रहे रेल अवसंरचना विकास के पैमाने, परियोजना की प्रमुख उपलब्धियों, उभरते अवसरों तथा सुरक्षित, सुदृढ़ और स्थायी निर्माण सुनिश्चित करने में प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।
पूसीरे के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने बताया है कि अपने संबोधन के दौरान, बंसल ने पूसीरे (नि) वर्तमान में राजधानी कनेक्टिविटी परियोजनाएं सहित 1,800 किलोमीटर से अधिक की नई लाइन और दोहरीकरण परियोजनाओं का जिक्र किया, जिनकी कुल परियोजना लागत लगभग 96,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इनमें से लगभग 596 किलोमीटर का कार्य अब तक पूरा हो चुका है, जबकि अगले पांच वर्षों के दौरान परियोजनाओं को शुरू करने का एक व्यापक कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कठिन भू-भाग, भारी बारिश, भूगर्भीय अनिश्चितताओं, भूस्खलन, पर्यावरण व भूमि-संबंधी मुद्दों और सीमित पहुंच के कारण पूर्वोत्तर में रेलवे निर्माण कार्य अत्यंत विशिष्ट इंजीनियरिंग चुनौतियों से भरा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए विशिष्ट इंजीनियरिंग समाधानों, उन्नत निर्माण तकनीकों तथा सुरक्षा, गुणवत्ता और मजबूती पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होती है। प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए, बंसल ने कहा कि 51 किलोमीटर लंबी बइरबी-सायरंग नई लाइन का कार्य पूरा हो चुका है। यह परियोजना मिजोरम की राजधानी के समीप स्थित सायरंग को रेल कनेक्टिविटी प्रदान करती है, जिसका निर्माण व्यापक सुरंग और पुलों वाले कठिन पहाड़ी भूभाग से होकर किया गया है।
111 किलोमीटर लंबी अररिया-गलगलिया नई लाइन 11 जुलाई, 2025 को पूरी तरह से चालू कर दी गई। डिमापुर-कोहिमा नई लाइन पर, धनसिरी-शोखुवि और शोखुवि-मॉलवॉम सेक्शन पहले ही चालू किए जा चुके हैं, जबकि 14 किलोमीटर लंबे मॉलवॉम-फेरिमा सेक्शन को मार्च, 2027 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। लगभग 111 किलोमीटर लंबी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिरिबाम-इम्फाल नई लाइन के 55 किलोमीटर से अधिक हिस्से को विभिन्न हिस्सों में शुरू किया जा चुका है। इसके अगले 9.10 किलोमीटर लंबे खोंगसांग-अवांगखुल सेक्शन को अक्टूबर, 2026 में चालू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दोहरीकरण के मामले में, कटिहार-कुरेठा (11 कि.मी.) और कटिहार-सोनैली (17 कि.मी.) सेक्शनों को 19 जून 2026 को चालू किया गया था।
बंसल ने आगामी रेल परियोजनाओं की एक महत्वपूर्ण श्रृंखला पर भी प्रकाश डाला। पूसीरे (नि) के अधीन वर्तमान में 69 सर्वेक्षण प्रगति के विभिन्न चरणों में हैं और अंतिम स्थान सर्वेक्षण का कार्य चल रहा है। प्रौद्योगिकी-संचालित निर्माण के महत्व पर जोर देते हुए, बंसल ने एनएटीएम-आधारित टनलिंग, भूवैज्ञानिक मानचित्र, इंस्ट्रूमेंटेशन, यंत्रीकृत निर्माण, ड्रोन, जीएनएसएस, जीआईएस, बीआईएम और डिजिटल परियोजना निगरानी को अपनाए जाने पर प्रकाश डाला। उन्होंने आगे इस बात पर भी जोर दिया कि पूर्वोत्तर में भविष्य की रेल अवसंरचना को इस प्रकार से डिजाइन किए जाने की आवश्यकता है कि वह चरम प्रतिकूल मौसम की स्थितियों का सामना कर सके और साथ ही इसके पर्यावरणीय प्रभाव को भी कम किया जा सके।
अपने संबोधन का समापन करते हुए, बंसल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कठिन और चुनौतीपूर्ण भूभागों में परियोजनाओं को पूरा करने में एनएफआर (निर्माण) द्वारा प्राप्त किए गए अनुभव ने मूल्यवान संस्थागत ज्ञान और नवीन इंजीनियरिंग पद्धतियों को जन्म दिया हैं। सुरक्षित, टिकाऊ, तकनीकी रूप से उन्नत और पर्यावरण के अनुकूल रेल असंरचना के निर्माण पर मुख्य रूप से रेल अवसंरचना तैयार करने पर केंद्रित है, जिसे निर्धारित समय-सीमा और लागत मापदंडों के भीतर पूरा किया जा सके। परिणामस्वरूप, पूर्वोत्तर में बेहतर कनेक्टिविटी और इसके समग्र विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया जा सकेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

