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राजस्व क्षेत्र में दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे का शानदार प्रदर्शन

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राजस्व क्षेत्र में दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे का शानदार प्रदर्शन


गुवाहाटी, 08 अप्रैल (हि.स.)। वित्त वर्ष 2025-26 में दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे (डीएचआर) के यात्री यातायात और राजस्व में जबरदस्त बढ़ोतरी पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे) के लिए गर्व का विषय है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त डीएचआर, भारत के ऐतिहासिक पहाड़ी रेलवे में एक अनोखा स्थान रखता है। यह प्रतिष्ठित हेरिटेज ट्रेन अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध विरासत और यात्रा के अनोखे अनुभव से दुनिया भर के पर्यटकों और रेल प्रेमियों को निरंतर आकर्षित कर रहा है। हाल ही में यात्रियों के लिए शुरू किए गए कई पहल, बेहतर सेवाओं और पर्यटन पर केंद्रित प्रयासों ने इसकी लोकप्रियता को काफी बढ़ाया है, जिससे यह सबसे पसंदीदा और लोकप्रिय हेरिटेज रेल यात्राओं में से एक के रूप में अपनी उपस्थिति को काफी मजबूती से पेश कर रहा है।

पूसीरे के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने आज बताया है कि वित्त वर्ष 2025–26 में, यात्रियों की संख्या बढ़कर 2.15 लाख हो गई, जबकि आय बढ़कर 25 करोड़ रुपये से अधिक हुई है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की तुलना में यात्रियों की आवाजाही में लगभग 17.72 प्रतिशत और आय में लगभग 14.71प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। यह प्रतिष्ठित हेरिटेज ट्रेन की बढ़ती लोकप्रियता और लगातार बनी हुई मांग को उजागर करता है, साथ ही दार्जिलिंग क्षेत्र में स्थानीय रोजगार और पर्यटन-आधारित आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

यह शानदार बढ़ोतरी पूसीरे द्वारा अपनाए गए एक बहु-आयामी दृष्टिकोण के ज़रिए हासिल की गई है, जिसका मुख्य ज़ोर दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के ऐतिहासिक आकर्षण को बनाए रखते हुए यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने पर है। इसमें शामिल मुख्य पहलों में विशेष पर्यटन अनुभव, ज़रूरत के हिसाब से तैयार की गई सेवाएं, हितधारकों के साथ मज़बूत जुड़ाव और बुनियादी ढांचे व यात्रियों की सुविधाओं में निरंतर सुधार शामिल हैं। डीएचआर में यात्रियों की बढ़ती संख्या, दार्जिलिंग की पहाड़ियों में आजीविका को सहयोग और पर्यटन को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

वित्त वर्ष 2025–26 में दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे का प्रदर्शन उस स्थिति को पुनः पुष्ट करता है, जिसके तहत इसे भारत की सबसे अनमोल रेलवे विरासतों में से एक तथा समृद्ध सांस्कृतिक एवं इंजीनियरिंग धरोहर का प्रतीक माना जाता है। पूसीरे भावी पीढ़ियों के लिए इस प्रतिष्ठित अद्वितीय को संरक्षित रखने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।-----------------

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय