नई एमएमसीएच इमारत में 997 बिस्तरों के साथ शुरू होंगी उन्नत चिकित्सा सेवाएं, मिलावटी पनीर पर सख्त कार्रवाई करेगा असम
गुवाहाटी, 03 नवंबर (हि.स.)। असम सरकार ने गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (जीएमसीएच) की विभिन्न चिकित्सा सेवाओं को महेंद्र मोहन चौधरी अस्पताल (एमएमसीएच) की नवनिर्मित इमारत में स्थानांतरित करने की तैयारियां पूरी कर ली हैं। नई इमारत में कुल 997 बिस्तरों के साथ उन्नत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही राज्य सरकार ने नकली पनीर और मानकविहीन दुग्ध उत्पादों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री अशोक सिंघल ने मंगलवार को दिसपुर स्थित अपने कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आम जनता को सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना तथा लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
मंत्री ने बताया कि एमएमसीएच की नई इमारत को मरीजों के उपचार के लिए तैयार कर लिया गया है। इसमें कुल 997 बिस्तरों की व्यवस्था की गई है। इनमें 112 क्रिटिकल केयर बेड, छह विशेष निगरानी बेड, 30 बिस्तरों वाला डायलिसिस केंद्र और भुगतान के आधार पर उपलब्ध 52 प्रीमियम कमरे शामिल हैं। इसके अलावा आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था की गई है तथा विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सा विभागों के लिए आधुनिक आधारभूत सुविधाएं विकसित की गई हैं।
सिंघल ने कहा कि जीएमसीएच के विभिन्न विभागों की सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से नई एमएमसीएच इमारत में स्थानांतरित किया जाएगा। इस दौरान मरीजों के उपचार में किसी तरह की बाधा नहीं आए, इसके लिए विशेष योजना तैयार की गई है। विशेष रूप से आपातकालीन और गंभीर मरीजों की चिकित्सा सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रहेंगी। सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के बाद ही आपातकालीन सेवाओं को स्थानांतरित किया जाएगा। इन सेवाओं का स्थानांतरण अंतिम चरण में उचित योजना और निगरानी के तहत किया जाएगा।
नई इमारत में मेडिसिन, सर्जरी, नाक-कान-गला, श्वसन रोग, प्लास्टिक सर्जरी, गठिया रोग और मनोरोग विभागों के साथ-साथ रेडियोलॉजी तथा प्रयोगशाला सेवाओं के कुछ हिस्सों को भी स्थानांतरित किया जाएगा। मंत्री ने उम्मीद जताई कि आधुनिक आधारभूत सुविधाओं और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था से मरीजों को उन्नत उपचार का वातावरण मिलेगा तथा अस्पताल की समग्र सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। उन्होंने स्थानांतरण प्रक्रिया को सुचारु रूप से पूरा करने के लिए आम जनता से सहयोग की अपील की।
दूसरी ओर, मंत्री ने नकली पनीर और मानकविहीन दुग्ध उत्पादों के खिलाफ सरकार की सख्त नीति स्पष्ट करते हुए कहा कि खाद्य पदार्थों में मिलावट और गलत जानकारी देकर उपभोक्ताओं को धोखा देने की गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने राज्य के विभिन्न स्थानों पर अभियान चलाकर पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों के नमूने एकत्र किए थे। सरकारी खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला में जांच के दौरान कुछ उत्पादों में निर्धारित मात्रा में दूध की वसा नहीं होने तथा उनमें अतिरिक्त पानी, स्टार्च, वनस्पति तेल और अन्य गैर-दुग्ध पदार्थ मिलाए जाने की जानकारी सामने आई।
जांच में यह भी पाया गया कि ऐसे उत्पादों को असली पनीर बताकर बेचा जा रहा था, जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो रहे थे।
इस संबंध में असम खाद्य सुरक्षा आयुक्तालय की ओर से 31 अक्टूबर, 2026 को जारी आदेश के अनुसार राज्यभर में निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने वाले और अनधिकृत दुग्ध विकल्प उत्पादों के निर्माण, भंडारण, बिक्री, वितरण और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है। कानूनी रूप से संशोधित या विस्तारित नहीं किए जाने की स्थिति में यह प्रतिबंध एक वर्ष तक प्रभावी रहेगा।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने वाले किसी भी उत्पाद को असली पनीर बताकर नहीं बेचा जा सकता। दूध की वसा के स्थान पर वनस्पति तेल या अन्य गैर-दुग्ध वसा से तैयार उत्पादों को असली पनीर के रूप में बेचना उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है।
उन्होंने होटल, रेस्तरां, खानपान सेवाएं उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं और अन्य खाद्य कारोबारियों से खरीदे जाने वाले उत्पादों की गुणवत्ता तथा उनके स्रोत की पुष्टि करने और खाद्य सुरक्षा से संबंधित सभी कानूनों एवं सरकारी निर्देशों का पालन करने की अपील की।
सिंघल ने चेतावनी दी कि सरकारी आदेश का उल्लंघन कर प्रतिबंधित उत्पादों का निर्माण, बिक्री, भंडारण या वितरण करने वाले व्यक्तियों एवं प्रतिष्ठानों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित उत्पादों को बाजार से वापस मंगाने, व्यावसायिक लाइसेंस निलंबित या रद्द करने के साथ-साथ कानूनी मुकदमे भी दर्ज किए जाएंगे।
खाद्य सुरक्षा विभाग राज्य के विभिन्न हिस्सों में नियमित निरीक्षण और अभियान जारी रखेगा। मंत्री ने आम जनता से खाद्य पदार्थ खरीदते समय सतर्क रहने की अपील करते हुए विशेष रूप से पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों के पैकेट पर दर्ज जानकारी, निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि और खाद्य सुरक्षा लाइसेंस की जानकारी जांचने का सुझाव दिया। उन्होंने संदिग्ध खाद्य पदार्थों या मिलावट की जानकारी मिलने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सूचित करने की भी अपील की।
मंत्री ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा आधारभूत संरचना विकसित करने के साथ-साथ सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना भी जनस्वास्थ्य की सुरक्षा का अनिवार्य हिस्सा है। राज्य सरकार बेहतर चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के साथ खाद्य पदार्थों में मिलावट और उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

