भारतीय इतिहास और ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी 17 से 19 तक
गुवाहाटी, 14 जून (हि.स.)। भारतीय इतिहास संकलन समिति, असम के तत्वावधान में तथा कॉटन विश्वविद्यालय, उत्तर लखीमपुर विश्वविद्यालय और नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी (एनईएचयू) के संयुक्त सहयोग से 17 से 19 जुलाई तक कॉटन विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। संगोष्ठी का मुख्य विषय “परंपरा से परिवर्तन तक : आधुनिक शासन व्यवस्था में भारतीय इतिहास और भारतीय ज्ञान परंपरा का समन्वय” रखा गया है।
आयोजकों के अनुसार, वैश्वीकरण और तकनीकी प्रगति के वर्तमान दौर में भारतीय सांस्कृतिक विरासत तथा भारतीय ज्ञान परंपरा (आईकेएस) को आधुनिक शासन प्रणाली, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा सामाजिक जीवन के साथ जोड़ने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। संगोष्ठी में भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता, आर्थिक आत्मनिर्भरता, परिवार की भूमिका, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, भारतीय इतिहास, संविधान तथा राष्ट्रीय विकास जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा।
संगोष्ठी में शिक्षाविद, वैज्ञानिक, शोधार्थी, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं, समाजसेवी, नीति-निर्माता तथा सरकारी अधिकारी भाग ले सकेंगे। प्रतिभागी मौखिक अथवा पोस्टर प्रस्तुति के माध्यम से अपने शोध प्रस्तुत कर सकेंगे। कार्यक्रम में ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से सहभागिता की सुविधा उपलब्ध रहेगी।
आयोजन समिति ने बताया कि शोध-सार (एब्स्ट्रैक्ट) जमा करने की अंतिम तिथि 20 जून निर्धारित की गई है, जबकि स्वीकृति की सूचना 21 जून को दी जाएगी। पूर्ण शोध-पत्र जमा करने की अंतिम तिथि 30 जून तथा पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 जुलाई है। संगोष्ठी का आयोजन 17, 18 और 19 जुलाई को किया जाएगा।
पंजीकरण शुल्क शिक्षाविदों एवं वैज्ञानिकों के लिए एक हजार रुपये, शोधार्थियों के लिए 500 रुपये तथा छात्र प्रतिभागियों के लिए 200 रुपये निर्धारित किया गया है। आयोजन समिति ने इच्छुक प्रतिभागियों से समय पर पंजीकरण और शोध-पत्र प्रस्तुत करने का आग्रह किया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

