रंगाली बिहू के पांचवें दिन मनाया जा रहा नांगल बिहू
गुवाहाटी, 18 अप्रैल (हि.स.)। आज रंगाली बिहू के पांचवें दिन नांगल (हल) बिहू पूरे असम में पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन बहाग महीने के पांचवें दिन के रूप में भी मनाया जाता है और ‘सात बिहू’ के पांचवें दिन के तौर पर इसका विशेष महत्व है। यह पर्व मुख्य रूप से कृषि कार्यों से जुड़ा हुआ है और कृषक समुदाय द्वारा इसे विशेष रूप से मनाया जाता है।
इस अवसर पर किसानों ने आज सुबह अपने कृषि उपकरणों जैसे हल, जुआल और अन्य औजारों की साफ-सफाई कर उनके पास दीप और धूप जलाकर पूजा-अर्चना की। यह परंपरा आने वाले कृषि सत्र के लिए समृद्धि और अच्छी फसल की कामना का प्रतीक मानी जाती है।
नांगल बिहू असम के कृषक जीवन में विशेष महत्व रखता है। बहाग बिहू के उल्लास के बाद यह दिन खेतों में उतरने की तैयारी का संकेत देता है। राज्यभर में, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में, किसानों ने पूरे उत्साह के साथ इस परंपरा का पालन करते हुए अच्छी फसल और सुख-समृद्धि की कामना की।
हालांकि, बदलते समय और आधुनिक तकनीक के प्रभाव से पारंपरिक कृषि पद्धतियों में बदलाव आया है। अब खेती में ट्रैक्टर और अन्य आधुनिक उपकरणों के बढ़ते उपयोग के कारण पारंपरिक औजारों का महत्व कुछ हद तक कम हुआ है। इसके बावजूद, राज्य के कई हिस्सों में आज भी नांगल बिहू की परंपरा जीवंत है और लोग इसे श्रद्धा के साथ मनाते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

