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गौहाटी विश्वविद्यालय ने ज्योतिप्रसाद अग्रवाल परिवार के साथ मूल कृतियों के संरक्षण हेतु एमओयू पर किए हस्ताक्षर

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गौहाटी विश्वविद्यालय ने ज्योतिप्रसाद अग्रवाल परिवार के साथ मूल कृतियों के संरक्षण हेतु एमओयू पर किए हस्ताक्षर


गुवाहाटी, 05 फ़रवरी (हि.स.)। ज्योतिप्रसाद अग्रवाल केवल एक कलाकार ही नहीं थे; उन्होंने असम की सामाजिक, सांस्कृतिक और मानवीय चेतना को अभिव्यक्त किया। उनकी कृतियों का संरक्षण एक अकादमिक ही नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी भी है, यह बातें आज गौहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति नानी गोपाल महंत ने सांस्कृतिक आइकन ज्योतिप्रसाद अग्रवाल के परिवार के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के अवसर पर कही। यह एमओयू ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की मौलिक रचनाओं के संरक्षण, प्रलेखन और डिजिटल अभिलेखीकरण को अकादमिक व शोध उपयोग के लिए सुनिश्चित करने हेतु किया गया है। समझौते पर विश्वविद्यालय के संचार एवं पत्रकारिता विभाग और अग्रवाल परिवार के सदस्यों के बीच हस्ताक्षर किए गए।

इस पहल का उद्देश्य अग्रवाल से संबंधित दुर्लभ पांडुलिपियों, फ़िल्म पटकथाओं, पत्राचार, नाटकों, कविताओं और अन्य अभिलेखीय सामग्री को सुरक्षित रखना है। इन सामग्रियों में से कई जॉयमोती फ़िल्म पर किए गए शोध के दौरान सामने आईं, जिसे संचार एवं पत्रकारिता विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ. भारती भराली ने शोधार्थी संगीता बोरा के साथ मिलकर किया था। यह संपूर्ण संग्रह कृष्णकांत हैंडिक केंद्रीय पुस्तकालय के पांडुलिपि संरक्षण विभाग में सुरक्षित रखा जाएगा।

सभा को संबोधित करते हुए प्रो. महंत ने कहा कि सिनेमा, साहित्य और रंगमंच में अग्रवाल का योगदान असम के सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास को समझने में अत्यंत मूल्यवान है। उन्होंने कहा कि यह एमओयू इन सामग्रियों के सुव्यवस्थित संरक्षण, प्रलेखन और डिजिटलीकरण को सुनिश्चित करेगा, जिससे आने वाले वर्षों में शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम जनता को इन तक पहुंच मिल सकेगी।

'प्रिवेंशन एंड डॉक्यूमेंटेशन ऑफ द ऑरिजिनल वर्क्स ऑफ ज्योतिप्रसाद अग्रवाल 'शीर्षक वाली इस परियोजना के अंतर्गत सभी अभिलेखीय सामग्री पुस्तकालय की पांडुलिपि संरक्षण इकाई के संरक्षण में रखी जाएगी और स्थापित संरक्षण मानकों का पालन किया जाएगा। शोध और शिक्षण को बढ़ावा देने के लिए दस्तावेज़ों के डिजिटल संस्करण चरणबद्ध तरीके से तैयार किए जाएंगे।

डॉ. भारती भराली ने ज्योतिप्रसाद अग्रवाल के परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने विश्वविद्यालय पर विश्वास जताया और महान कलाकार की पांडुलिपियों तक पहुंच और उनके प्रलेखन की अनुमति दी। उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता सांस्कृतिक विरासत के प्रति विश्वविद्यालय की अकादमिक जिम्मेदारी को दर्शाता है तथा शोधार्थी संगीता बोरा सहित कई व्यक्तियों द्वारा दिए गए सहयोग को स्वीकार किया।

ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की पुत्री सत्यश्री दास और रूप मंता दास ने कलाकार की मौलिक कृतियों के दीर्घकालिक संरक्षण और अकादमिक उपयोग की दिशा में कदम उठाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

एमओयू हस्ताक्षर समारोह में ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की पुत्री ज्ञानश्री पाठक एवं अन्य पारिवारिक सदस्य, अकादमिक रजिस्ट्रार प्रो. राजीव हैंडिक, कृष्णकांत हैंडिक पुस्तकालय के लाइब्रेरियन डॉ. प्रशांत डेका, संचार एवं पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. चंदन कुमार गोस्वामी, प्रो. अंकुरण दत्ता, सेंटर फॉर परफॉर्मिंग आर्ट्स एंड कल्चर के निदेशक प्रो. प्रांजल सैकिया, कुलपति के विशेष कार्याधिकारी डॉ. संजय कुमार दत्ता, कुलपति के सचिव एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मृणाल ज्योति डेका, वरिष्ठ पत्रकार मृणाल तालुकदार सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्र उपस्थित थे।

हिन्दुस्थान समाचार / देबजानी पतिकर