असम की ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी : बिस्वजीत दैमारी
नलबाड़ी, 06 नवंबर (हि.स.)। असम के स्वदेशी एवं जनजातीय आस्था एवं संस्कृति तथा हथकरघा, वस्त्र एवं रेशम उत्पादन मंत्री बिस्वजीत दैमारी ने शुक्रवार को राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत के संरक्षण के लिए सरकार, शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों से सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।
दैमारी नलबाड़ी जिले के नमती स्थित कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं प्राचीन अध्ययन विश्वविद्यालय (केबीवीएसएएसयू) में आयोजित राज्य स्तरीय विरासत जागरूकता कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
अपने संबोधन में मंत्री ने असम की ऐतिहासिक विरासत और सभ्यतागत जड़ों को संरक्षित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विरासत संरक्षण का दायरा केवल ऐतिहासिक स्मारकों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
उन्होंने युवा पीढ़ी से असम के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को गहराई से समझने तथा भावी पीढ़ियों के लिए इस विरासत को संरक्षित करने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।
इस कार्यक्रम का संयुक्त आयोजन असम सरकार के स्वदेशी एवं जनजातीय आस्था एवं संस्कृति विभाग के अधीन पुरातत्व निदेशालय तथा कुमार भास्कर वर्मा संस्कृत एवं प्राचीन अध्ययन विश्वविद्यालय ने किया। इसका उद्देश्य राज्य की समृद्ध पुरातात्विक विरासत के संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना और आम लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद पुरातत्व निदेशालय, असम के प्रभारी निदेशक डॉ. नवजीत देउरी ने स्वागत भाषण दिया।
इस अवसर पर बरखेत्री के विधायक नारायण डेका, नलबाड़ी के जिला आयुक्त निवेदन दास पटवारी, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रह्लाद आर. जोशी, कुलसचिव डॉ. मनोज कुमार शर्मा और नलबाड़ी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. कमल नयन पटवारी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

