home page

मणिपुर में अफीम के बदले वैकल्पिक खेती को प्रोत्साहित करने में जुटी पुलिस एवं एनसीबी

 | 
मणिपुर में अफीम के बदले वैकल्पिक खेती को प्रोत्साहित करने में जुटी पुलिस एवं एनसीबी


इंफाल, 22 अप्रैल (हि.स.)। मणिपुर के पहाड़ी एवं दूर-दराज इलाकों में अवैध रूप से की जाने वाली अफीम की खेती सरकार के लिए लंबे समय से परेशानी का सबब बना रहा है। इसको रोकने के लिए विभिन्न विभागों की एजेंसियां मिलकर कार्य कर रही है। इस दौरान किसानों के लिए उनकी आजीविका की सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। खासकर प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन किसानों को लालच, डरा-धमकाकर अंदरुनी इलाकों में अफीम की खेती को संचालित करने की कोशिशों में जुटे रहे हैं। इसको रोकने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाये हैं।

इस बीच किसानों को इस अवैध कार्यों से बचाने के लिए मणिपुर पुलिस भी एक सामाजिक कदम उठाते हुए आजीविका के रास्ते दिखाने की कोशिशों में जुट गयी है। राज्य पुलिस मुख्यालय द्वारा इस संबंध में बुधवार को आधिकारिक रूप से बताया गया है कि मणिपुर पुलिस ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के साथ मिलकर, चुराचांदपुर ज़िले में 'हिनची' नामक एक समुदाय-आधारित पहल शुरू की है। जिसका अर्थ है 'जीवन के बीज' (सिड्स आफ लाइफ), जो आशा और नई शुरुआत का प्रतीक है।

इस पहल के तहत, ज़िले के तीन संवेदनशील क्षेत्रों को (जिनकी पहचान अवैध अफ़ीम की खेती के लिए अतिसंवेदनशील क्षेत्रों के रूप में की गई थी) रणनीतिक रूप से लक्षित किया गया। लगातार संपर्क और बातचीत के ज़रिए, सभी ग्राम प्रमुखों और 127 लाभार्थी परिवारों को विश्वास में लिया गया और उन्हें वैकल्पिक नकदी फ़सलों के माध्यम से टिकाऊ और वैध आजीविका के विकल्पों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत इस परियोजना को चेन्नई स्थित टेक्नोलॉजी फ़र्म 'सेगुला टेक्नोलॉजी ' से 28,00,000 रुपये की उदार वित्तीय सहायता प्राप्त हुई।

इस सहायता के साथ, मणिपुर पुलिस ने सभी पहचाने गए लाभार्थियों को लगभग 55,000 किलोग्राम अदरक के बीज, 450 किलोग्राम मटर के बीज और 6,500 केले के पौधे वितरित करने की सुविधा प्रदान की।

आगे चलकर, मणिपुर पुलिस, एनसीबी और स्थानीय एनजीओ 'एनएआरपीएस' की संयुक्त टीमें सक्रिय और समय-समय पर निगरानी करेंगी। इससे जवाबदेही सुनिश्चित होगी, निरंतर मार्गदर्शन मिलेगा और किसानों को फ़सल कटाई के बाद के प्रबंधन तथा बाज़ार से जुड़ने में सहायता मिलेगी।

हिनचीन सामूहिक संकल्प का एक प्रमाण है, जो जोखिम को मज़बूती में बदलता है और एक सुरक्षित, आत्मनिर्भर भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है। पुलिस के इस पहल को राज्य में अफीम की खेती पर लगाम कसने में बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय