असम रायफल्स पर घात लगाकर किये गये हमले में अपनी भूमिका से एनएससीएन-आईएम ने किया इनकार
इंफाल, 07 जुलाई (हि.स.)। नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालिम (एनएससीएन) इसाक-मुइवा (आईएम) ने मणिपुर के उखरुल ज़िले में असम राइफल्स के काफिले पर सोमवार को हुए उस हमले में किसी भी तरह की भागीदारी से इनकार किया है, जिसमें दो जवान बलिदानी हो गए थे। संगठन ने ज़ोर देकर कहा कि वह केंद्र के साथ हुए संघर्ष-विराम समझौते और चल रही भारत-नगा शांति प्रक्रिया के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
एनएससीएन-आईएम की ओर से आज जारी एक बयान में संगठन ने कहा है कि नुंगशांग खोंग इलाके में हुआ हमला- जिसके बारे में शक है कि इसे 'ईस्टर्न फ्लैंक' गुट (जो मुख्य संगठन से अलग हो गया था) के एक सशस्त्र समूह ने अंजाम दिया होगा, उसका एनएससीएन-आईएम से कोई लेना-देना नहीं है।
संगठन ने कहा कि उनका संगठन इस घटना में न तो शामिल था और न ही इसे इसके बारे में कोई जानकारी थी। साथ ही, संगठन ने दोहराया कि वह संघर्ष-विराम समझौते का सम्मान करता है और तय नियमों का पालन करता है। एनएससीएन-आईएम ने कहा है कि उनका संगठन कभी भी ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा, जिससे चल रही भारत-नगा राजनीतिक बातचीत कमज़ोर हो, पटरी से उतरे या उसमें बाधा आए। संगठन ने कहा कि एक सम्मानजनक और शांतिपूर्ण राजनीतिक समाधान ही उसका अटूट लक्ष्य है।
शांति प्रक्रिया में बाधा डालने वाली गतिविधियों की निंदा करते हुए, संगठन ने सभी संबंधित पक्षों से संयम और ज़िम्मेदारी बरतने की अपील की, ताकि बातचीत के ज़रिए समाधान की दिशा में हो रही प्रगति पर कोई आंच न आए। यह बयान उस घटना के एक दिन बाद आया है जब संदिग्ध उग्रवादियों ने नगा-बहुल उखरुल ज़िले में असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था, जिसमें दो जवान बलिदानी हो गए और कई अन्य घायल हो गए।
बलिदानी जवानों की पहचान वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह और हवलदार चंद्र मोहन सिंह के रूप पर हुई है। हमले के बाद, सुरक्षा बलों ने दोषियों का पता लगाने के लिए इलाके में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया, जबकि मणिपुर सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया है
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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

