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धुबड़ी में वामपंथी समूहों के ‘जेल भरो’ आंदोलन के दौरान 100 से अधिक हिरासत में लिये गये

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धुबड़ी में वामपंथी समूहों के ‘जेल भरो’ आंदोलन के दौरान 100 से अधिक हिरासत में लिये गये


धुबड़ी (असम), 10 अगस्त (हि.स.)। सेंटर ऑफ़ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीआईटीयू), ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस), ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन (एआईडीडब्ल्यूए), डेमोक्रेटिक यूथ फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (डीवाईएफआई) और स्टूडेंट्स फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफआई) के सदस्यों ने सोमवार को धुबड़ी में ‘जेल भरो’ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की नीतियों को मज़दूर और किसान-विरोधी बताया। ज्ञात हो कि इस तरह का आंदोलन शोणितपुर जिला मुख्यालय तेजपुर में भी आयोजित किया गया।

यह विरोध प्रदर्शन वामपंथी संगठनों द्वारा शुरू किए गए देशव्यापी कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया था। इसका मकसद सरकारी नीतियों के खिलाफ़ जनमत तैयार करना था, जिनके बारे में उनका आरोप था कि वे मज़दूरों, किसानों, खेतिहर मज़दूरों और समाज के अन्य वर्गों पर बुरा असर डाल रही हैं।

संगठनों ने कहा कि यह कार्यक्रम 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' की भावना से प्रेरित था। उन्होंने देश के संसाधनों और कामकाजी लोगों के अधिकारों को कॉर्पोरेट-संचालित नीतियों से बचाने के लिए संघर्ष तेज़ करने का आह्वान किया।

एक संयुक्त बयान में, उन्होंने आरोप लगाया कि मज़दूरों के अधिकारों और कल्याणकारी उपायों—जिनमें पेंशन, चिकित्सा लाभ और वेतन से जुड़े प्रावधान शामिल हैं—में कटौती की जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि छोटे और मध्यम उद्योगों के बंद होने से नौकरियां गई हैं, जबकि स्थायी रोज़गार की जगह तेज़ी से अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर नियुक्तियां और आउटसोर्सिंग ले रही हैं।

संगठनों ने बेरोज़गारी पर भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि कॉर्पोरेट मुनाफ़े में बढ़ोतरी के साथ-साथ कामकाजी लोगों की क्रय शक्ति (खरीदने की क्षमता) घट रही है और आर्थिक मुश्किलें बढ़ रही हैं।

कृषि के मुद्दे पर, समूहों ने आरोप लगाया कि किसानों को उनकी ज़मीनों से बेदखल किया जा रहा है और ज़मीन कम कीमत पर बड़े कॉर्पोरेट घरानों को दी जा रही है। उन्होंने भूमिहीन किसान परिवारों और खेतिहर मज़दूरों के लिए सरकार की अपर्याप्त मदद की भी आलोचना की।

संगठनों ने असम के विभिन्न हिस्सों में बेदखली अभियानों का विरोध किया, जिनमें पर्वतझोरा से लेकर काज़ीरंगा इलाके तक के क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे अभियानों से किसानों और आम निवासियों पर बुरा असर पड़ रहा है।

उन्होंने सैटेलाइट शहर विकसित करने के नाम पर तिवा समुदाय के सदस्यों को कथित तौर पर बेदखल किए जाने का भी विरोध किया। उनका दावा था कि ऐसे कदमों से लंबे समय से बसे समुदायों के बजाय कॉर्पोरेट हितों को फ़ायदा होगा।

समूहों ने आरोप लगाया कि ऐसी नीतियों का विरोध करने वाले लोगों को गिरफ़्तार किया जा रहा है। इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। सोमवार के कार्यक्रम के तहत, 100 से ज़्यादा प्रदर्शनकारियों ने धुबड़ी रेलवे स्टेशन परिसर से एक रैली निकाली। यह जुलूस स्टेशन रोड से गुज़रा, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया और धुबड़ी पुलिस स्टेशन ले गई।

आयोजकों ने मज़दूरों, किसानों, खेतिहर मज़दूरों और समाज के अन्य वर्गों से उस आंदोलन में शामिल होने की अपील की, जिसे उन्होंने शोषण, विस्थापन और लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक के ख़िलाफ़ बताया।

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हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय