असम में संरक्षण आधारित पर्यटन पर जोर, काजीरंगा में 4.58 लाख पर्यटक पहुंचे
गुवाहाटी, 27 सितंबर (हि.स.)। असम के वन मंत्री जयंत मल्लबरुवा ने रविवार को राज्य में वन्यजीव एवं प्रकृति पर्यटन के विस्तार के साथ संरक्षण और स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक अवसरों के बीच संतुलन पर जोर दिया।
मल्लबरुवा ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि 2025-26 में काजीरंगा में 4.58 लाख पर्यटक पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 4.22 लाख थी।
उन्होंने कहा कि काजीरंगा का अनुभव अब केवल पारंपरिक सफारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। नेचर और साइकिलिंग ट्रेल, ईको-स्टे, स्थानीय व्यंजन परोसने वाले रेस्तरां तथा बोट सफारी के माध्यम से पर्यटकों को व्यापक प्राकृतिक परिदृश्य से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि असम में ऐसे पर्यटन मॉडल को मजबूत करने का उद्देश्य प्राकृतिक विरासत का संरक्षण, जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना और जंगलों के आसपास रहने वाले समुदायों तक संरक्षण से जुड़े आर्थिक लाभ पहुंचाना है।
विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर उन्होंने मानस राष्ट्रीय उद्यान का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार मानस में पर्यटकों की संख्या 2021-22 में 52,962 से बढ़कर 2025-26 में 63,723 हो गई है। उन्होंने कहा कि अब संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए पर्यटन के अवसरों को पार्क की सीमाओं से बाहर तक ले जाने पर ध्यान दिया जा रहा है। स्थानीय युवाओं को गाइड के रूप में अवसर देने, सामुदायिक होमस्टे, जीप सफारी और अन्य नए अनुभव विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
मल्लबरुवा ने पोबितोरा को भी तेजी से उभरते प्रकृति-पर्यटन स्थल के रूप में रेखांकित किया। यहां 2025-26 में 35,371 पर्यटक पहुंचे। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्र से सटे समुदायों को संरक्षण गतिविधियों में शामिल करते हुए गाइडिंग और व्याख्या के क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा किए जा रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि पर्यटन का उद्देश्य केवल वन्यजीवों का दर्शन कराना नहीं, बल्कि पर्यटकों को पूरे प्राकृतिक परिदृश्य से परिचित कराना भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन संरक्षण को मजबूत करे और संरक्षण स्थानीय लोगों के लिए नए अवसर पैदा करे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

