असम के जागरण, स्वाभिमान और आत्मसम्मान के अग्रदूत थे कलागुरु राभा : दिलीप सैकिया
गुवाहाटी, 20 जून, (हि.स.)। असम प्रदेश भाजपा ने शनिवार को महान क्रांतिकारी, जननायक कलाकार और सांस्कृतिक प्रतीक कलागुरु विष्णु प्रसाद राभा की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पार्टी ने उन्हें असम के जागरण, स्वाभिमान और आत्मसम्मान का अग्रदूत बताते हुए उनके योगदान को सदैव प्रेरणास्रोत बताया।
असम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने वशिष्ठ स्थित पार्टी के प्रदेश मुख्यालय अटल बिहारी वाजपेयी भवन में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में कलागुरु राभा के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। राभा दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्य मंत्री बिमल बोरा की उपस्थिति में सैकिया ने कहा कि विष्णु प्रसाद राभा ने असमिया समाज के सम्मान, आत्मगौरव और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए आजीवन संघर्ष किया तथा जनमानस में नई चेतना का संचार किया।
उन्होंने कहा कि राभा केवल एक गीतकार, नाटककार, कथाकार, मानवशास्त्री, फिल्मकार, चित्रकार और दार्शनिक ही नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे निर्भीक क्रांतिकारी थे जिन्होंने समाज को जागृत करने और राष्ट्रीय स्वाभिमान को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सैकिया ने कहा कि आने वाली पीढ़ियां भी कलागुरू के आदर्शों और योगदान को सदैव स्मरण रखेंगी।
इस अवसर पर असम की तीन विशिष्ट गायिकाओं संध्या मेनन, शांता उजीर और मालविका बोरा को संगीत, संस्कृति तथा सामाजिक जीवन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
वहीं, असम प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता मानस सरनिया ने एक अलग बयान में कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि विष्णु प्रसाद राभा ने अपने जीवनभर शोषण, भेदभाव और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस शासन की नीतियों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण राभा को राजनीतिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।
सरनिया ने कहा कि राभा ने असम की विभिन्न जातियों और समुदायों को सांस्कृतिक पुनर्जागरण तथा क्रांतिकारी विचारधारा के माध्यम से संगठित करने का प्रयास किया। उनका सपना एक ऐसे समाज का निर्माण करना था, जो सांस्कृतिक समन्वय, समानता और सामूहिक प्रगति पर आधारित हो।
भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन ने राभा को राष्ट्रविरोधी करार देने का प्रयास किया तथा उन्हें और उनकी पत्नी को सन् 1951 में कोकराझाड़ से गिरफ्तार कर जेल में बंद किया गया। उन्होंने कहा कि असम की जनता अपने इस महान आदिवासी क्रांतिकारी और सांस्कृतिक नायक के साथ हुए अन्याय को कभी नहीं भूलेगी।
सरनिया ने कांग्रेस से मांग की कि वह विष्णु प्रसाद राभा के साथ हुए कथित अपमान, उत्पीड़न और अन्याय के लिए असम की जनता से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगे। उन्होंने प्रश्न किया कि कांग्रेस आखिर कब कलागुरु राभा के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय के लिए अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

