इस्कॉन असम के स्वर्ण जयंती समारोह एवं भक्त महोत्सव का भव्य शुभारंभ
- हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने किया सम्मेलन का उद्घाटन
गुवाहाटी, 30 अक्टूबर (हि.स.)। इस्कॉन असम ने शुक्रवार को अपनी 50वीं वर्षगांठ यानी स्वर्ण जयंती के अवसर पर गुवाहाटी स्थित श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में भव्य नामहट्टा सम्मेलन एवं भक्त महोत्सव का शुभारंभ किया। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने मुख्य अतिथि के रूप में समारोह का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राज्य के करीब 25 जिलों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पूरा परिसर हरे कृष्ण महामंत्र और कृष्ण नाम संकीर्तन से भक्तिमय हो उठा।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि समाज से अनैतिकता, हिंसा और अशांति को दूर करने के लिए महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और श्रीमंत माधवदेव के आदर्शों के साथ-साथ इस्कॉन के संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपाद की कृष्ण चेतना एवं आध्यात्मिक विचारधारा सही मार्ग दिखाती है। उन्होंने कहा कि इस्कॉन की 50 वर्षों की यात्रा ने असम के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है।
आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में करीब 500 वर्ष पहले महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और श्रीमंत माधवदेव द्वारा प्रचारित कृष्ण भक्ति की परंपरा को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया हिंसा, घृणा, अपराध, युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में शांति और सद्भाव की स्थापना के लिए कृष्ण भक्ति एवं आध्यात्मिक चेतना महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इस अवसर पर इस्कॉन असम की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में प्रकाशित विशेष स्मारिका 'पांचजन्य' का भी अतिथियों ने विमोचन किया।
समारोह में इस्कॉन के गवर्निंग बॉडी कमिश्नर भक्तिपुरुषोत्तम स्वामी महाराज, इस्कॉन नामहत्र के निदेशक गौरांग प्रेम करुणा स्वामी महाराज, गुवाहाटी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. ननी गोपाल महंत, बरपेटा सत्र के सत्राधिकारी डॉ. बाबुल चंद्र दास कश्यप, भाजपा असम प्रदेश के महासचिव अनूप बर्मन तथा बीटीसी प्रमुख हग्रामा महिलारी के मीडिया सलाहकार अपूर्व अधिकारी सहित मायापुर धाम के कई वरिष्ठ संत एवं संन्यासी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर इस्कॉन मायापुर से आए माधव हरि दास प्रभु ने कहा कि पवित्र कार्तिक महीने में गुवाहाटी में हरिनाम संकीर्तन का आयोजन असम में नव-वैष्णव परंपरा के प्रचार-प्रसार को नई दिशा प्रदान करेगा।
महोत्सव के दौरान जपमाला सत्र, वैदिक नृत्य, भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ, सत्रिया नृत्य, बरगीत की प्रस्तुति तथा महाप्रसाद वितरण सहित विभिन्न आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
इस्कॉन नामहत्र असम के मुख्य आयोजक एवं प्रबंधक करुणामय चैतन्य दास कौशिक प्रभु ने समाज में शांति, एकता और सद्भाव स्थापित करने के इस प्रयास में लोगों से सक्रिय भागीदारी और सहयोग की अपील की।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

