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विकास को टिकाऊ और समावेशी बनाने पर भी जोर-केंद्रीय मंत्री शेखावत

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विकास को टिकाऊ और समावेशी बनाने पर भी जोर-केंद्रीय मंत्री शेखावत


इटानगर, 30 अक्टूबर (हि.स.)। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार का लक्ष्य पूर्वोत्तर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाना है। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि क्षेत्र में पर्यटन का विकास टिकाऊ और समावेशी हो तथा इसका लाभ स्थानीय समुदायों तक पहुंचे।

शेखावत ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश के तवांग में 14वें 'इंटरनेशनल टूरिज्म मार्ट 2026' का उद्घाटन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नए पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने और स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका के अधिक अवसर पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि 13 साल बाद तवांग में आयोजित हो रहा इंटरनेशनल टूरिज्म मार्ट पूर्वोत्तर की पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा, हिमालय के मनोरम प्राकृतिक दृश्य, बौद्ध विरासत, समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं और पारंपरिक जीवनशैली इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विशिष्ट बनाती हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर में साहसिक पर्यटन की भी व्यापक संभावनाएं हैं। ट्रेकिंग, माउंटेन बाइकिंग और प्रकृति के बीच पैदल यात्राओं जैसी गतिविधियों के माध्यम से पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए प्रशिक्षित गाइड, उपयुक्त उपकरण, सुरक्षा के स्पष्ट नियम और पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से साहसिक पर्यटन युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकता है। शेखावत ने कहा, सुव्यवस्थित पर्यटन आयोजन मुख्य पर्यटन सीजन के अलावा भी पर्यटकों को आकर्षित करने में मददगार हो सकते हैं। इससे स्थानीय कलाकारों को मंच मिलेगा और होटल, होमस्टे, रेस्तरां, परिवहन सेवाओं तथा शिल्पकारों के लिए कारोबार के अवसर बढ़ेंगे।

संस्कृति क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकतों में से एक

शेखावत ने कहा कि पूर्वोत्तर की संस्कृति इस क्षेत्र की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। यहां के समुदाय अपनी परंपराओं और रोजमर्रा के जीवन के माध्यम से इसे जीवंत बनाए हुए हैं। नॉर्थ ईस्ट बाजार में पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और वस्त्रों को प्रदर्शित किया जा रहा है। वहीं, स्थानीय व्यंजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां आठों पूर्वोत्तर राज्यों की विविधता से प्रतिनिधियों को परिचित कराएंगी। उन्होंने कहा कि पर्यटन के माध्यम से शिल्पकारों और कलाकारों को उनके कौशल एवं मेहनत का उचित मूल्य मिलना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने कहा, पर्यटन व्यवसायों को स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने और सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी