सृजनात्मक हिन्दी लेखन कार्यशाला एवं हिंदी पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन
बंगाईगांव (असम), 23 सितम्बर (हि.स.)। नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, बंगाईगांव के तत्वावधान में बंगाईगांव रिफाइनरी द्वारा बुधवार को केंद्रीय विद्यालय, न्यू बंगाईगांव में ‘सृजनात्मक हिंदी लेखन’ विषय पर कार्यशाला एवं हिंदी पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति रुचि विकसित करने के साथ-साथ उनकी रचनात्मक अभिव्यक्ति, लेखन-कौशल एवं साहित्यिक चेतना को प्रोत्साहित करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय विद्यालय, न्यू बंगाईगांव के प्राचार्य विशाल खरे के मार्गदर्शन में हुआ। इस अवसर पर विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भाषा केवल विचारों को व्यक्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संवेदनाओं, कल्पनाओं और सृजनात्मकता को आकार देने का सशक्त साधन है। उन्होंने विद्यार्थियों से नियमित रूप से हिंदी साहित्य पढ़ने तथा अपनी कल्पनाओं को लेखन के माध्यम से अभिव्यक्त करने का आह्वान किया।
कार्यशाला के मुख्य संकाय सदस्य युवा कवि एवं रंगकर्मी मो. रहमान ने विद्यार्थियों को सृजनात्मक लेखन की विभिन्न विधाओं से परिचित कराया। उन्होंने कहानी, कविता, संस्मरण, संवाद तथा अन्य रचनात्मक विधाओं में लेखन के मूल तत्वों पर रोचक एवं संवादात्मक तरीके से चर्चा की। उन्होंने कहा कि अच्छी रचना के लिए कल्पनाशीलता के साथ-साथ निरंतर अध्ययन, संवेदनशील दृष्टि और अपने आसपास की घटनाओं को समझने की क्षमता आवश्यक है। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को छोटे-छोटे लेखन अभ्यास भी कराए गए, जिससे उन्होंने अपनी रचनात्मक प्रतिभा को अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण हिंदी पुस्तक प्रदर्शनी रही। प्रदर्शनी में हिन्दी साहित्य, कविता, कहानी, बाल साहित्य, ज्ञान-विज्ञान तथा विविध विषयों से संबंधित पुस्तकों का प्रदर्शन किया गया। पुस्तक प्रदर्शनी के आयोजन में हिंदी स्थान प्रकाशन, जयपुर का सहयोग रहा। विद्यार्थियों ने प्रदर्शनी में विशेष रुचि दिखाई और विभिन्न पुस्तकों के बारे में जानकारी प्राप्त की। आयोजकों ने कहा कि विद्यार्थियों में पुस्तक पढ़ने की आदत विकसित करना उनके बौद्धिक एवं रचनात्मक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस अवसर पर बंगाईगांव रिफाइनरी की ओर से हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति विद्यार्थियों की रुचि को बढ़ावा देने तथा विद्यालयों में राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि पढ़ना, सोचना और लिखना-सृजनात्मक व्यक्तित्व के विकास की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। कार्यशाला एवं पुस्तक प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य से जुड़ने तथा अपनी कल्पनाशक्ति को लेखन के माध्यम से व्यक्त करने का एक सार्थक अवसर प्रदान किया।
हिन्दुस्थान समाचार / किशोर मिश्रा

