हिंदी लेखन की नई संभावनाओं से रूबरू हुए प्रतिभागी, न्यू बंगाईगांव में पुस्तक प्रदर्शनी
न्यू बंगाईगांव (असम), 28 सितम्बर (हि.स.)। हिंदी केवल कार्यालयीन कार्यों और संचार की भाषा ही नहीं, बल्कि विचारों, भावनाओं और अनुभवों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने का सशक्त माध्यम भी है। सृजनात्मक लेखन के माध्यम से भाषा के प्रति लोगों का जुड़ाव और अधिक मजबूत किया जा सकता है।
यह बातें पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे पर्यवेक्षक प्रशिक्षण केंद्र, न्यू बंगाईगांव के प्राचार्य एवं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि देवाशीष पाठक ने सोमवार को केंद्र परिसर में आयोजित सृजनात्मक हिंदी लेखन कार्यशाला एवं हिंदी पुस्तक प्रदर्शनी के अवसर पर कही।
कार्यक्रम का आयोजन नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति (नराकास), बंगाईगांव द्वारा किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों में हिंदी के रचनात्मक प्रयोग को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ पठन-पाठन की संस्कृति को बढ़ावा देना था।
कार्यशाला के संकाय सदस्य मो. रहमान, युवा कवि एवं रंगकर्मी ने प्रतिभागियों को सृजनात्मक लेखन की विभिन्न विधाओं एवं तकनीकों से परिचित कराया। उन्होंने कविता, कहानी, संस्मरण, संवाद और अन्य रचनात्मक विधाओं में लेखन के लिए आवश्यक संवेदनशीलता, कल्पनाशीलता और भाषा की सहजता पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने प्रतिभागियों को अपने आसपास के जीवन, घटनाओं और अनुभवों को लेखन का विषय बनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला को संवादात्मक एवं व्यावहारिक बनाए रखने के लिए प्रतिभागियों के साथ विभिन्न रचनात्मक गतिविधियां भी कराई गईं।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित हिंदी पुस्तक प्रदर्शनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। हिंदीस्थान प्रकाशन, जयपुर के सहयोग से आयोजित प्रदर्शनी में साहित्य, कविता, कहानी, व्यक्तित्व-विकास, ज्ञान-विज्ञान तथा अन्य विषयों से संबंधित पुस्तकों को प्रदर्शित किया गया। प्रशिक्षण केंद्र के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं प्रतिभागियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और अपनी रुचि की पुस्तकों के बारे में जानकारी प्राप्त की। पुस्तक प्रदर्शनी ने कार्यक्रम को साहित्यिक वातावरण प्रदान करने के साथ प्रतिभागियों को हिंदी पुस्तकों से सीधे जुड़ने का अवसर दिया।
इस अवसर पर शरद कुमार, सदस्य सचिव, नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, बंगाईगांव, विनय कुमार, वरिष्ठ व्याख्याता, पर्यवेक्षक प्रशिक्षण केंद्र तथा विकास रावल, निदेशक, हिंदीस्थान प्रकाशन, जयपुर की विशेष उपस्थिति रही।
नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति, बंगाईगांव द्वारा राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार तथा हिंदी के व्यावहारिक एवं रचनात्मक प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यालयों एवं संस्थानों में कार्यशालाओं, साहित्यिक कार्यक्रमों और पुस्तक प्रदर्शनियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में आयोजित यह कार्यक्रम हिंदी को कार्यालयीन भाषा से आगे बढ़ाकर सृजनात्मक अभिव्यक्ति और पठन की भाषा के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक सार्थक पहल रहा।
हिन्दुस्थान समाचार / किशोर मिश्रा

