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सेना के फर्जी वीडियो पर असम के मुख्यमंत्री ने की कानूनी कार्रवाई की मांग, कांग्रेस पर साधा निशाना

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सेना के फर्जी वीडियो पर असम के मुख्यमंत्री ने की कानूनी कार्रवाई की मांग, कांग्रेस पर साधा निशाना


गुवाहाटी, 27 अक्टूबर (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के नाम से प्रसारित डिजिटल रूप से छेड़छाड़ किए गए वीडियो को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक लाभ के लिए भारतीय सशस्त्र बलों की छवि खराब करने और देश को शर्मिंदा करने के उद्देश्य से यह वीडियो प्रसारित किया गया। मुख्यमंत्री ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

सरमा ने इस कथित दुष्प्रचार को कांग्रेस की “क्लासिक प्लेबुक” करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए लिखा कि सेना को बदनाम करने और देश को शर्मिंदा करने के लिए राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से एक ऐसा वीडियो प्रसारित किया गया, जिसका पहले ही खंडन किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि यह कोई सामान्य गलती नहीं थी, बल्कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी से ऐसा किया गया। उन्होंने कहा कि इस कृत्य में शामिल लोगों को कानून के पूरे दायरे में लाकर दंडित किया जाना चाहिए।

विवादित वीडियो में सेना की स्पीयर कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल गिरिश कालिया के नाम से अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों पर चीन के कथित कब्जे और भारतीय सैनिकों को आवश्यक आपूर्ति से वंचित किए जाने संबंधी बयान दिखाए गए हैं।

वीडियो में दावा किया गया है कि चीन ने अरुणाचल प्रदेश के असाफिला, लोंगजू और तक्सिंग सर्किल पर नियंत्रण कर लिया है। इसमें यह भी आरोप लगाया गया है कि केंद्र सरकार चीन के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय राज्य में जेनरेशन जेड के प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध अर्धसैनिक बलों को तैनात करने को प्राथमिकता दे रही है।

इसके अलावा, वीडियो में 25 भारतीय सैनिकों को गिरफ्तार किए जाने और उनके ठिकाने की जानकारी नहीं होने का दावा किया गया है। इसमें देश की क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

हालांकि, भारतीय सेना के आधिकारिक तथ्य-जांच माध्यम इंडियन आर्मी फैक्ट चेक (@MythbusterXX) ने वीडियो को फर्जी करार देते हुए खारिज कर दिया। सेना के अनुसार, वीडियो में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित लिप-सिंकिंग और आवाज की नकल करने वाली तकनीक का इस्तेमाल कर वरिष्ठ अधिकारी के नाम से झूठे बयान प्रसारित किए गए हैं।

सेना ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो में इस्तेमाल किए गए मूल दृश्य 27 अक्टूबर, 2023 को जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के हैं। उस समय लेफ्टिनेंट जनरल कालिया 28 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग थे और नियंत्रण रेखा पर आतंकवाद विरोधी अभियानों के संबंध में मीडिया को जानकारी दे रहे थे।

मूल संवाददाता सम्मेलन में घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करने और सुरक्षा अभियानों में मिली सफलताओं का उल्लेख किया गया था। सेना ने उस समय घुसपैठ की 10 कोशिशों को नाकाम करने, 27 आतंकवादियों को मार गिराने तथा युद्ध संबंधी सामग्री और मादक पदार्थ बरामद करने की जानकारी दी थी।

सेना ने साफ किया कि अधिकारी ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के कब्जे या भारतीय सैनिकों को आवश्यक आपूर्ति से वंचित किए जाने के संबंध में कोई बयान नहीं दिया था।

25 अक्टूबर को जारी तथ्य-जांच में सेना ने कहा कि वीडियो के जरिए एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के कथित खुलासे के रूप में मनगढ़ंत बयान पेश करने का प्रयास किया गया। सेना ने इसे सैन्य दुष्प्रचार फैलाने और आम लोगों में भय पैदा करने के उद्देश्य से तैयार की गई कृत्रिम सामग्री बताया।

सेना ने सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से अपील की कि वे किसी भी वीडियो को साझा करने से पहले उसके मूल स्रोत और प्रामाणिकता की जांच करें। उसने चेतावनी दी कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों में छेड़छाड़ की गई सामग्री का प्रसार जनता को गुमराह कर सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश