विधानसभा में 'असम हायर एजुकेशन काउंसिल बिल-2026' पेश, उच्च शिक्षा में समन्वय के लिए बनेगी नई परिषद
गुवाहाटी, 28 जुलाई (हि.स.)। असम सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में 'असम हायर एजुकेशन काउंसिल बिल, 2026' पेश किया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के अनुरूप लाए गए इस विधेयक का उद्देश्य राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र में शैक्षणिक एवं प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करना तथा विश्वविद्यालयों, राज्य सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के बीच एक प्रभावी समन्वय तंत्र स्थापित करना है।
विधानसभा में विधेयक पेश करते हुए शिक्षा मंत्री डॉ. रानोज पेगू ने कहा कि प्रस्तावित असम हायर एजुकेशन काउंसिल बिल राज्य में उच्च शिक्षा के लिए एक केंद्रीय समन्वयकारी संस्था के रूप में कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में यूजीसी राष्ट्रीय स्तर पर नियामक संस्था के रूप में कार्य करता है, जबकि राज्य के विश्वविद्यालय विधानसभा के अधिनियमों के तहत स्थापित स्वायत्त संस्थान हैं। दूसरी ओर, उच्च शिक्षा निदेशालय मुख्य रूप से प्रशासनिक कार्यों का संचालन करता है और शैक्षणिक मामलों के समन्वय की कोई अलग व्यवस्था नहीं है। इसी कमी को दूर करने के लिए इस परिषद के गठन का प्रस्ताव लाया गया है।
डॉ. पेगू ने कहा कि एनईपी-2020 उच्च शिक्षा संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय, गुणवत्ता सुधार और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था पर विशेष बल देती है। ऐसे में राज्य को एक ऐसी संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता थी, जो यूजीसी, राज्य सरकार और विश्वविद्यालयों के बीच सेतु का कार्य कर सके। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित परिषद उच्च शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक नीतियों के क्रियान्वयन, प्रशासनिक समन्वय तथा गुणवत्ता सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
विधेयक के अनुसार, असम हायर एजुकेशन काउंसिल का ढांचा दो-स्तरीय होगा। इसमें एक जनरल काउंसिल तथा एक एग्जीक्यूटिव काउंसिल का गठन किया जाएगा। एग्जीक्यूटिव काउंसिल की अध्यक्षता राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी करेंगे, जबकि जनरल काउंसिल में राज्य के विश्वविद्यालयों, स्वायत्त महाविद्यालयों, सामान्य डिग्री कॉलेजों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ यूजीसी के एक नामित सदस्य को भी शामिल किया जाएगा। परिषद का उद्देश्य विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय स्थापित करना, नीतिगत सुझाव देना तथा उच्च शिक्षा के समग्र विकास के लिए संस्थागत ढांचा तैयार करना होगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि नई परिषद के गठन से उच्च शिक्षा संस्थानों के शैक्षणिक और कार्यकारी दोनों स्तरों पर निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। इससे विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय बढ़ेगा, नीतियों के क्रियान्वयन में एकरूपता आएगी और राज्य में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
इस दौरान डॉ. पेगू ने हालिया बाढ़ से शिक्षा क्षेत्र पर पड़े प्रभाव की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने उन विद्यार्थियों की सहायता के लिए विशेष कदम उठाए हैं, जिनकी पाठ्यपुस्तकें और स्कूल यूनिफॉर्म बाढ़ में नष्ट हो गई थीं। शिवसागर और चराईदेव जिलों के विद्यार्थियों के लिए नई पुस्तकों की व्यवस्था कर दी गई है और अगले दो दिनों के भीतर उनका वितरण शुरू कर दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 1.5 लाख विद्यार्थियों को नई स्कूल यूनिफॉर्म की आवश्यकता होगी। सरकार ने इसके लिए भी आवश्यक तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही, क्षतिग्रस्त स्कूल भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य विस्तृत क्षति आकलन रिपोर्ट मिलने के बाद शुरू किया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के सहयोग से स्कूल परिसरों को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वेक्षण किया जा रहा है। रिपोर्ट प्राप्त होते ही स्कूल शिक्षा विभाग मरम्मत, पुनर्निर्माण और अन्य आवश्यक कार्य युद्धस्तर पर शुरू करेगा, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां जल्द से जल्द सामान्य हो सकें।
सरकार के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, हालिया बाढ़ से शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट जिलों के लगभग 80 प्रतिशत विद्यालय प्रभावित हुए हैं। इन विद्यालयों में सामान्य शिक्षण व्यवस्था बहाल करने के लिए बड़े पैमाने पर पुनर्स्थापन और आधारभूत संरचना के सुधार की आवश्यकता है। राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए सभी आवश्यक कदम प्राथमिकता के आधार पर उठाए जाएंगे।-------------
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय

