गौहाटी विश्वविद्यालय में ‘भाषार ओजा’ हेमचंद्र बरुवा की 130वीं पुण्यतिथि मनाई गई
गुवाहाटी, 01 मई (हि.स.)। गौहाटी विश्वविद्यालय में असमिया भाषा के महान पुरोधा, ‘भाषार ओजा’ के रूप में विख्यात और प्रसिद्ध शब्दकोश ‘हेमकोष’ के रचयिता हेमचंद्र बरुवा की 130वीं पुण्यतिथि अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षकों, विद्यार्थियों और विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर ननी गोपाल महंत ने हेमचंद्र बरुवा के योगदान को “हिमालय के समान विशाल” बताते हुए कहा कि असमिया भाषा के विकास, संरक्षण और आत्मसम्मान को स्थापित करने में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि हेमकोष जैसी अमूल्य कृति के माध्यम से बरुवा ने न केवल भाषा को वैज्ञानिक और व्यवस्थित रूप प्रदान किया, बल्कि असमिया समाज को एक सुदृढ़ आधार भी दिया। आज भी उनके विचार और कार्य हमें भाषा संरक्षण और विकास के प्रति प्रेरित करते हैं।
इस अवसर पर स्मिताक्षी बी. गोस्वामी ने भी भाषार ओजा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।
उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि हेमचंद्र बरुवा केवल एक भाषाविद् नहीं थे, बल्कि समाज के एक सच्चे मार्गदर्शक भी थे। उन्होंने असमिया भाषा को समृद्ध और संगठित रूप देने के साथ-साथ समाज सुधार के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। विशेष रूप से महिलाओं की स्थिति सुधारने, विधवा विवाह को बढ़ावा देने और अंधविश्वासों के विरुद्ध आवाज उठाने में उनकी भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।
गौहाटी विश्वविद्यालय के संचार एवं पत्रकारिता विभाग के प्रोफेसर चंदन कुमार गोस्वामी ने कहा कि उस समय सीमित संसाधनों के बावजूद हेमकोष का निर्माण करना एक अद्भुत उपलब्धि थी। यदि उन्होंने उस समय इस दिशा में कार्य नहीं किया होता, तो संभव है कि आज असमिया भाषा अस्तित्व के संकट का सामना कर रही होती। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी रचनाएं आज के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अध्ययन सामग्री हैं।
कार्यक्रम में ‘सादिन-प्रतिदिन’ समूह के प्रतिनिधि ऋषि बरुवा, वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश महंत, इल्लोरा विज्ञान मंच के सदस्य, स्नातकोत्तर छात्र संघ के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। सभी ने महान विद्वान को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लिया।
हिन्दुस्थान समाचार / देबजानी पतिकर

