कामरूप मेट्रो प्रशासन ने दी भूस्खलन संवेदनशील पहाड़ों के निवासियों को चेतावनी
गुवाहाटी, 30 जून (हि.स.)। गुवाहाटी में पहाड़ों पर रहने वाले लोगों को प्रशासन ने सतर्क रहने की सख्त चेतावनी दी है। ज्ञात हो कि गुवाहाटी में किए गए एक व्यापक सर्वेक्षण में 366 भूस्खलन संवेदनशील स्थलों की पहचान की गई है। इन स्थानों पर रहने वाले लोगों को प्रशासन द्वारा लगातार चेतावनी दी जाती रही है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में किए गए एक अध्ययन में सामने आया कि अधिकांश भूस्खलन प्राकृतिक कारणों की जगह मानवीय गतिविधियों के कारण हो रहे हैं, जिससे शहर की नाजुक पहाड़ी पारिस्थितिकी पर अनियोजित शहरीकरण के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। कामरूप (मेट्रो) जिला आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से इसको लेकर किए गए सर्वेक्षण में चौंकाने वाले तथ्यों का खुलासा किया गया है।
सर्वेक्षण में गुवाहाटी के नवग्रह, नरकासुर, नारंगी, नूनमाटी शांतिपुर, शरणिया, शुक्रेश्वर, सुनसाली फटासिल, गरभंगा, गोटानगर, हेंगराबाड़ी, जालुकबाड़ी-लंकेश्वर, काहिलीपाड़ा, कालापहाड़, कामाख्या-नीलाचल, खानापाड़ा, खारगुली, कोईनाधरा और मालीगांव सहित 20 पहाड़ी क्षेत्रों को शामिल किया गया। इनमें खारगुली में सर्वाधिक 77 संवेदनशील स्थल पाए गए। इसके बाद नूनमाटी में 40, नरेंगी में 37, खानापाड़ा में 33, मालीगांव में 31 और जालुकबाड़ी-लंकेश्वर में 30 स्थलों की पहचान की गई।
अध्ययन के अनुसार 95 प्रतिशत भूस्खलन संभावित स्थल मानवजनित कारणों से प्रभावित हैं, जबकि केवल पांच प्रतिशत मामलों में प्राकृतिक कारण जिम्मेदार पाए गए। पहाड़ों की कटाई, तीव्र ढलानों पर निर्माण कार्य, जल निकासी व्यवस्था की कमी और अनियंत्रित शहरी विस्तार को ढलानों की अस्थिरता का प्रमुख कारण बताया गया है।
सर्वेक्षण में पाया गया कि 88 प्रतिशत संवेदनशील ढलानों का झुकाव 60 डिग्री तक है, जबकि सात प्रतिशत ढलानों का झुकाव 60 डिग्री से अधिक है। वहीं, 57 प्रतिशत स्थलों की ऊंचाई पांच मीटर से कम, 20 प्रतिशत की पांच से दस मीटर, 18 प्रतिशत की 11 से 15 मीटर तथा पांच प्रतिशत की 15 मीटर से अधिक पाई गई।
वनस्पति आवरण के विश्लेषण में सामने आया कि 45 प्रतिशत संवेदनशील ढलानों पर किसी प्रकार का हरित आवरण नहीं है, जिससे कटाव और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। 36 प्रतिशत स्थलों पर घास और झाड़ियां मौजूद हैं, जबकि केवल 19 प्रतिशत स्थानों पर वृक्ष आवरण पाया गया, जो ढलानों को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
भूगर्भीय संरचना के आधार पर 62 प्रतिशत संवेदनशील ढलान चट्टान और मिट्टी के मिश्रण से बने हैं, 34 प्रतिशत केवल मिट्टी से तथा चार प्रतिशत पूरी तरह चट्टानी संरचना वाले हैं।
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि 74 प्रतिशत चिन्हित स्थलों पर जन-धन की सुरक्षा के लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। निगरानी और योजना निर्माण को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सभी स्थलों को गूगल अर्थ पर मैप किया गया है, जिससे प्रशासन को जोखिम वाले क्षेत्रों की स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
अध्ययन ने भूस्खलन के खतरे को कम करने के लिए पहाड़ियों की कटाई पर कड़े नियंत्रण, बेहतर जल निकासी व्यवस्था, व्यापक वृक्षारोपण कार्यक्रम तथा वैज्ञानिक भूमि उपयोग योजना को तत्काल लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
कामरूप (मेट्रो) जिला प्रशासन द्वारा मंगलवार को फिर से इन संवेदनशील भूस्खलन की संभावना वाले स्थानों पर रहने वालों को चेतावनी दी गई है। देखना यह है कि इन खतरनाक स्थानों पर रह रहे लोग प्रशासन द्वारा दी जा रही लगातार चेतावनी के पति गंभीरता दिखाते हैं या नहीं।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

