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सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्टः अरुणाचल सरकार ने चार प्रदर्शनकारियों को किया रिहा

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इटानगर, 07 नवंबर (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश सरकार ने शनिवार को चार प्रदर्शनकारियों - अदुम तायोम, ओमक पारोन, ओकुत पालोह और ओसन पारोन को रिहा कर दिया। इन्हें प्रस्तावित 'सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट' के खिलाफ आंदोलन के सिलसिले में 'अरुणाचल प्रदेश गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 2014' के तहत हिरासत में लिया गया था।

यह फैसला बातचीत और सुलह के लिए एक अनुकूल माहौल बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे एक दिन पहले, मुख्यमंत्री कार्यालय ने शुक्रवार को एक संदेश के जरिए सरकार के इस फैसले की जानकारी दी थी कि हिरासत में लिए गए लोगों को 'सद्भावना के संकेत' के तौर पर रिहा किया जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना से जुड़े मामले में लगभग 10 लोगों/कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। इसके अलावा, सरकार ने उन 'गांव बूढ़ा' और 'गांव बूढ़ी' को फिर से बहाल करने की भी मंजूरी दे दी है, जिनके खिलाफ आंदोलन के दौरान अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी।

'सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम' की चार प्रमुख मांगों पर प्रतिक्रिया देते हुए, सरकार ने हिरासत में लिए गए चार लोगों की रिहाई, सुरक्षा बलों की वापसी, आपराधिक मामलों को वापस लेने और निलंबित ग्राम अधिकारियों व सरकारी कर्मचारियों की बहाली से जुड़े मुद्दों पर बात की।

सियांग घाटी से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और रैपिड एक्शन फोर्स को हटाने के सवाल पर, सरकार ने कहा कि वहां की मौजूदा कानून-व्यवस्था और सुरक्षा स्थिति को ध्यान में रखते हुए, फोरम के साथ होने वाली प्रस्तावित बैठक में इस पर चर्चा की जाएगी।

शिकायतों को वापस लेने के मामले में, सरकार ने कहा कि इसके लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा, साथ ही सरकार ने प्रस्तावित बातचीत के दौरान इस मुद्दे पर चर्चा करने की इच्छा भी जताई है। हालांकि, निलंबित या बर्खास्त सरकारी कर्मचारियों की बहाली को लेकर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।

आदि समुदाय की चिंताओं का आपसी सहमति से समाधान निकालने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए, सरकार ने फरोम से मुख्यमंत्री पेमा खांडू के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया है। साथ ही, संगठन से कहा गया है कि वे प्रस्तावित बैठक के लिए एक सुविधाजनक तारीख और अपने प्रतिनिधियों की सूची साझा करें।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब प्रस्तावित मेगा बांध का लगातार विरोध हो रहा है। इस विरोध के पीछे विस्थापन, पुश्तैनी गांवों के डूबने, पर्यावरण पर पड़ने वाले असर और मूल निवासियों के अधिकारों से जुड़ी चिंताएं हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी