home page

विकसित भारत के लिए पूर्वोत्तर की पशु स्वास्थ्य सुरक्षा पर क्षेत्रीय सम्मेलन का राज्यपाल ने किया उद्घाटन

 | 
विकसित भारत के लिए पूर्वोत्तर की पशु स्वास्थ्य सुरक्षा पर क्षेत्रीय सम्मेलन का राज्यपाल ने किया उद्घाटन


गुवाहाटी, 28 जुलाई (हि.स.)। असम के राज्यपाल एवं असम पशु चिकित्सा एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने मंगलवार को विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित ‘विकसित भारत के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र की पशु स्वास्थ्य सुरक्षा’ विषयक क्षेत्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। सम्मेलन का आयोजन कॉलेज ऑफ वेटरिनरी साइंस द्वारा किया गया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वस्थ पशुधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पशुधन भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, संस्कृति और विरासत का अभिन्न अंग है तथा स्वस्थ पशु, समृद्ध किसान, पर्यावरणीय संतुलन और वैज्ञानिक नवाचार विकसित भारत की आधारशिला हैं।

राज्यपाल ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र अपनी समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों के कारण आधुनिक विज्ञान एवं पारंपरिक ज्ञान के समन्वय से पशुधन विकास का राष्ट्रीय मॉडल बन सकता है। उन्होंने ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि पशु स्वास्थ्य, मानव स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास से सीधे जुड़ा हुआ है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा पशुपालन, डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे रोग नियंत्रण कार्यक्रमों, टीकाकरण अभियान, आधुनिक पशु चिकित्सा अवसंरचना और निवेश बढ़ाने की सराहना की। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में असम सरकार द्वारा पशुधन की गुणवत्ता सुधारने, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, डेयरी प्रणाली के आधुनिकीकरण और मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी प्रशंसा की।

इस अवसर पर राज्यपाल ने पशुधन रोग प्रबंधन और पशु रोगों की त्वरित पहचान के लिए विकसित दो सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन एनईआरएलडीएफ और पीडीडीईएस का भी लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि ये डिजिटल प्लेटफॉर्म पशु रोगों की निगरानी को मजबूत करेंगे और दूरदराज के क्षेत्रों के पशुपालकों को भी लाभ पहुंचाएंगे।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों से शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने तथा उसके लाभ गांवों तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह सम्मेलन पूर्वोत्तर क्षेत्र में पशु स्वास्थ्य सुरक्षा और पशुधन विकास के लिए नई तकनीकों, नवाचारों और सहयोग को बढ़ावा देगा।

सम्मेलन में आईसीएआर के उपमहानिदेशक (शिक्षा) डॉ. वाईपीएस मलिक, असम पशु चिकित्सा एवं मत्स्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. निरंजन कलिता, असम कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. दीपज्योति राजखोवा, आईसीएआर के पूर्व उपमहानिदेशक डॉ. केएम बुजरबरुवा, कॉलेज ऑफ वेटरिनरी साइंस के डीन डॉ. बीएन सैकिया सहित अनेक वैज्ञानिक, शोधकर्ता, छात्र एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

-----------

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश